देश की सियासत में एक बार फिर 'वंदे मातरम्' को लेकर बहस छिड़ गई है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं कांग्रेस पार्टी के तेज-तर्रार सांसद इमरान मसूद। अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले इमरान मसूद ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में भूचाल आना तय माना जा रहा है। सांसद ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी 'वंदे मातरम्' नहीं गाया है और न ही वह भविष्य में कभी इसे गाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इसके सम्मान में हमेशा खड़े जरूर रहेंगे।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला और भाजपा पर निशाना
एक निजी समाचार चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इमरान मसूद ने अपने इस रुख के पीछे की वजहों को विस्तार से समझाया। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि देश का संविधान उन्हें अपने धार्मिक विश्वासों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के तहत यह अधिकार देता है कि वह किन परंपराओं का पालन करें और किनका नहीं। मसूद ने कहा, 'हम संविधान के दायरे में रहने वाले लोग हैं। देश का संविधान हमें जो हक देता है, हम उसी के अनुसार चलते हैं।'
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर हमला बोला। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि बीजेपी जानबूझकर ऐसे मुद्दों को हवा देती है ताकि समाज में ध्रुवीकरण (Polarization) किया जा सके और असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने कहा कि भगवा पार्टी के पास विकास या बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात करने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह केवल इस तरह के नैरेटिव गढ़ने का काम करती है।
'सिर्फ खड़े होने से क्या कम हो जाता है सम्मान?'
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए इमरान मसूद ने तर्क दिया कि राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए केवल उसका गान करना ही एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान की बात आती है, वह पूरी गरिमा के साथ अपनी जगह पर खड़े होते हैं। उनके मुताबिक, सम्मान प्रकट करने का यह तरीका पूरी तरह से स्वीकार्य होना चाहिए, लेकिन एक विशेष एजेंडे के तहत इसे तूल दिया जा रहा है।
"मैंने आज तक वंदे मातरम् नहीं गाया है और आगे भी नहीं गाऊंगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उसका सम्मान नहीं करता। जब राष्ट्रीय गीत बजता है, मैं पूरी त तन्मयता और अदब के साथ अपनी जगह पर खड़ा होता हूं। यह मेरा संवैधानिक अधिकार है और कोई मुझपर अपनी मर्जी थोप नहीं सकता।" - इमरान मसूद, कांग्रेस सांसद
एनटीए और राहुल गांधी के बयानों का समर्थन
वंदे मातरम् विवाद के अलावा इमरान मसूद ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों को पूरी तरह से जायज ठहराया। मसूद ने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, ऐसे में राहुल गांधी का सरकार से जवाब मांगना देश के युवाओं के हित में है।
- युवाओं का भविष्य: नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों पर सरकार को घेरना विपक्ष का कर्तव्य है।
- सवालों से क्यों भाग रही सरकार: इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता बरतने के बजाय अपनी कमियों को छिपाने में लगी है।
- राहुल गांधी की भूमिका: उन्होंने कहा कि राहुल गांधी युवाओं की आवाज बनकर संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष कर रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई प्रतिक्रियाएं
इमरान मसूद के इस बयान के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां विपक्षी दल इस बयान को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि यह देश और राष्ट्रगीत का अपमान है। आने वाले दिनों में संसद और सड़क दोनों जगहों पर इस बयान को लेकर सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: इमरान मसूद ने 'वंदे मातरम्' को लेकर क्या बयान दिया है?
Ans: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा है कि उन्होंने पहले कभी वंदे मातरम् नहीं गाया है और भविष्य में भी नहीं गाएंगे, हालांकि वे इसके सम्मान में हमेशा खड़े होते हैं।
Q2: इमरान मसूद ने अपने बयान के पीछे क्या तर्क दिया है?
Ans: उन्होंने इसे अपना संवैधानिक अधिकार बताया है और कहा है कि देश का संविधान उन्हें अपने विश्वास के अनुसार जीने की आजादी देता है।
Q3: इमरान मसूद ने अन्य किन मुद्दों पर अपनी राय रखी?
Ans: वंदे मातरम् के अलावा उन्होंने एनटीए (NTA) परीक्षा विवाद पर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों को पूरी तरह से सही ठहराया है।