जनता की उम्मीदों पर खरे उतर पा रहे हैं प्रशासनिक अमले के ये बड़े आयोजन? उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसा ही सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है, जहां सदर तहसील परिसर में आयोजित 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' के दौरान फरियादियों की लंबी कतारें तो लगीं, लेकिन मौके पर न्याय पाने वालों की संख्या बेहद कम रही। जिला प्रशासन के दावों के उलट, इस बार के समाधान दिवस में केवल चंद मामलों का ही ऑन-द-spot समाधान हो सका, जिसके बाद अब अधिकारियों की कार्यशैली पर चर्चा शुरू हो गई है।
DM और SP ने खुद सुनी फरियादियों की दास्तान
सोमवार को चंदौली सदर तहसील में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम की कमान खुद जिलाधिकारी (DM) चंद्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक (SP) आकाश पटेल ने संभाल रखी थी। मकसद साफ था कि जनता को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और बड़े अधिकारी एक ही छत के नीचे उनकी समस्याएं सुनकर तुरंत राहत पहुंचा सकें।
कार्यक्रम के दौरान जिले के दूर-दराज के गांवों से पहुंचे तमाम लोगों ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा रखी। किसी की ज़मीन पर अवैध कब्जे की शिकायत थी, तो कोई पुलिसिया कार्रवाई न होने से परेशान था। राजस्व और विकास कार्यों से जुड़े मामलों का अंबार लग गया।
30 में से सिर्फ 3 मामलों का मौके पर निस्तारण
तमाम दावों और उमड़े जनसैलाब के बीच जब आंकड़ों पर नजर डाली गई, तो तस्वीर थोड़ी हैरान करने वाली थी। पूरे दिन चले इस समाधान दिवस में अधिकारियों के पास कुल 30 प्रार्थना पत्र पहुंचे। इनमें से तमाम शिकायतें ऐसी थीं जिनका निस्तारण कागजों पर महीनों से लटका हुआ था।
हालांकि प्रशासनिक मुस्तैदी दिखाते हुए अधिकारी मौके पर सिर्फ 03 मामलों का ही निस्तारण करवा पाए। बाकी बचे 27 प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए उन्हें तय समय सीमा के भीतर जांच कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
प्रशासन की सख्ती: लापरवाही पर गिरेगी गाज
कम मामलों के मौके पर निस्तारण होने से भले ही कुछ लोग निराश हुए हों, लेकिन जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग के तेवर पूरी तरह सख्त नजर आए। उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को दो-ूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जनसुनवाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
"अधिकारी केवल दफ्तर की चारदीवारी में बैठकर फाइलें न तैयार करें, बल्कि ज़मीन पर उतरकर स्थलीय निरीक्षण करें। जब तक समस्याओं का जड़ से समाधान नहीं होगा, तब तक इस तरह के आयोजनों का वास्तविक लाभ जनता को नहीं मिल पाएगा।" — चंद्र मोहन गर्ग, जिलाधिकारी, चंदौली
पुलिस विभाग को भी दिए गए विशेष निर्देश
सदर तहसील में आयोजित इस समाधान दिवस में पुलिस महकमे से जुड़े मामले भी छाए रहे। एसपी आकाश पटेल ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि जमीन विवाद और आपसी रंजिश के मामलों में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायतों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दोनों पक्षों को न्याय मिल सके और कानून व्यवस्था बनी रहे।
- कुल प्राप्त प्रार्थना पत्र: 30
- मौके पर निस्तारित मामले: 03
- जांच के लिए लंबित मामले: 27
- प्रमुख विभाग: राजस्व, पुलिस और विकास विभाग
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
आम जनता का सवाल यह है कि जब जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी (DM और SP) खुद जनता दरबार में मौजूद हों, तब भी अधिकांश मामलों का मौके पर निस्तारण क्यों नहीं हो पाता? जानकारों का मानना है कि मैदानी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों में विभागीय समन्वय की कमी के चलते फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहती हैं, जिसका खामियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ता है। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि 27 लंबित मामलों पर प्रशासन कितनी जल्दी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: चंदौली सदर तहसील में समाधान दिवस की अध्यक्षता किसने की?
Ans: इस संपूर्ण समाधान दिवस की संयुक्त अध्यक्षता जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आकाश पटेल ने की।
Q2: समाधान दिवस में कुल कितने प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए?
Ans: इस दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े कुल 30 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 3 का मौके पर निस्तारण हुआ।
Q3: लंबित शिकायतों का क्या हुआ?
Ans: बचे हुए 27 प्रार्थना पत्रों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपकर तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष जांच और समाधान के निर्देश दिए गए हैं।