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तीसरे विश्व युद्ध की आहट? ईरान और अमेरिका के बीच आर-पार की जंग तेज

तीसरे विश्व युद्ध की आहट? ईरान और अमेरिका के बीच आर-पार की जंग तेज

मध्य पूर्व (Middle East) में एक बार फिर से युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं। वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा शीत युद्ध अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर आ गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा 'आर्थिक डी-डे' (Economic D-Day) लाने की कसम खाई है, तो दूसरी तरफ ईरान ने भी तेवर कड़े करते हुए खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात को ठप करने की खुली चेतावनी दे दी है। इस ताजा टकराव ने पूरी दुनिया की नींद उड़ा दी है, क्योंकि इसके सीधे परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ने वाले हैं।

अमेरिका का 'आर्थिक डी-डे' और ईरान का पलटवार

अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए कमर कस ली है। व्हाइट हाउस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में तेहरान पर ऐसे कड़े प्रतिबंध थोपे जाएंगे जो इतिहास में कभी नहीं देखे गए। इसे पेंटागन और ट्रेजरी डिपार्टमेंट की भाषा में 'इकोनॉमिक डी-डे' नाम दिया गया है। इसका मकसद ईरान की वित्तीय रीढ़ को तोड़ना है ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम और छद्म संगठनों (Proxy Groups) को फंडिंग न कर सके।

हालांकि, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश की गई, तो खाड़ी के रास्ते किसी भी देश को तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी दुनिया की नजरें

इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील केंद्र 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान की धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। यदि तेहरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर पड़ेगा।

  • वैश्विक असर: क्रूड ऑयल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकते हैं।
  • आर्थिक मर्जी: भारत और एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
  • सैन्य तैनाती: अमेरिकी नौसेना ने क्षेत्र में अपने युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिए हैं।

विश्लेषकों की राय: क्या यह महायुद्ध की शुरुआत है?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोनों देश इस समय नर्व गेम खेल रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान कूटनीतिक टेबल पर आए और अपनी शर्तें माने, वहीं ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव को छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं है। इस बीच, खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई, कतर) की धड़कनें तेज हो गई हैं, क्योंकि युद्ध की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान उनके बुनियादी ढांचे को हो सकता है।

"यह संकट केवल दो देशों का नहीं है। यदि खाड़ी में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होती है, तो दुनिया भर में महंगाई का एक ऐसा बवंडर उठेगा जिसे संभालना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं होगा।" - ऊर्जा बाजार विशेषज्ञ

भारत पर क्या होगा इसका असर?

भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। भारत अपनी तेल जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। अगर युद्ध की स्थिति बनती है, तो भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने होंगे। साथ ही, खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी कूटनीतिक स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।


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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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