समंदर की लहरों के बीच देश की सरहदों की हिफाजत करना किसी भी सैनिक के लिए गर्व की बात होती है, लेकिन जब घर के भीतर ही अपनों पर संकट के बादल मंडराने लगें, तो फौलादी जिगर वाले भी अंदर से टूट जाते हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' पर तैनात एक अमेरिकी नौसैनिक का दर्द इन दिनों सोशल मीडिया और अमेरिकी मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। नौसैनिक जोशुआ अविलेस (Joshua Aviles) के पिता को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया है, जिसके बाद इस जवान की दुनिया मानों बिखर गई है।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच घर से आई बुरी खबर
मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर है। ऐसे में युद्धपोत पर तैनात जोशुआ अविलेस के लिए 12 से 14 घंटे की शिफ्ट में काम करना पहले ही मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद थकाने वाला था। इसी बीच, उनके घर से एक ऐसी खबर आई जिसने उनकी रातों की नींद उड़ा दी।
जोशुआ के पिता को इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है। एक तरफ समंदर के बीच दुश्मन के हमलों का खतरा और दूसरी तरफ अपने ही देश में पिता की कानूनी उलझनें—इस दोहरी मार ने इस युवा नौसैनिक को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। जोशुआ का कहना है कि अब युद्धपोत पर उनकी 12-12 घंटे की ड्यूटी उन्हें किसी पहाड़ जैसी भारी लगने लगी है, क्योंकि उनका ध्यान लगातार अपने परिवार की सुरक्षा पर अटका हुआ है।
आखिर क्या है पूरा मामला और क्यों हुई गिरफ्तारी?
सूत्रों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोशुआ अविलेस के पिता के इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर कुछ कानूनी अड़चनें थीं। अमेरिका में इमिग्रेशन कानूनों की सख्ती किसी से छिपी नहीं है। ICE (Immigration and Customs Enforcement) द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद से परिवार सदमे में है। हालांकि जोशुआ खुद अमेरिकी सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, लेकिन उनके परिवार को इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, इसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
इस घटना ने एक बार फिर अमेरिका में सैन्य परिवारों के अधिकारों और इमिग्रेशन नीतियों के बीच चल रही लंबी बहस को हवा दे दी है। कई मानवाधिकार संगठन और सैन्य समर्थन समूह अब इस मामले में आगे आए हैं और अधिकारियों से मानवीय आधार पर विचार करने की अपील कर रहे हैं।
नौसैनिक का छलका दर्द: 'ड्यूटी निभाऊं या परिवार बचाऊं?'
अपनी तैनाती के दौरान मीडिया से बात करते हुए जोशुआ ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, "हम यहां हजारों मील दूर देश की हिफाजत के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। हम दिन-रात समंदर के बीच पसीना बहाते हैं। लेकिन जब आपको यह पता चले कि आपके अपने घर में ही आपके पिता सुरक्षित नहीं हैं, तो आपका फोकस डगमगा जाता है।"
उन्होंने आगे कहा कि युद्धपोत पर रहते हुए वे अपने पिता की कानूनी मदद के लिए कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं, और यही लाचारी उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही है। 12 घंटे की भारी-भरकम ड्यूटी के बाद जब वे अपने केबिन में लौटते हैं, तो तनाव और बढ़ जाता है।
सेना और सरकार पर उठ रहे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग और इमिग्रेशन विभाग दोनों पर सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि कम से कम उन परिवारों को कुछ छूट या सुरक्षा मिलनी चाहिए जिनके बच्चे देश की फ्रंटलाइन पर तैनात हैं। हालांकि, प्रशासन का अपना पक्ष है कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों के तहत ही कार्रवाई की गई है।
इस मामले से जुड़े मुख्य बिंदु:
- तैनाती का स्थान: यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln), मिडिल ईस्ट।
- प्रभावित सैनिक: जोशुआ अविलेस (US Navy Sailor Joshua Aviles)।
- संकट: पिता को ICE (इमिग्रेशन अधिकारियों) द्वारा हिरासत में लिया जाना।
- सैनिक की प्रतिक्रिया: मानसिक तनाव और ड्यूटी के दौरान ध्यान भटकने की बात कही।
