यूक्रेन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। देश के एक हाल ही में बर्खास्त किए गए शीर्ष मंत्री ने अपनी ही सरकार और राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में पूर्व मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने सनसनीखेज बयान देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की से यह पूछा जाना चाहिए कि उन्हें देश में चल रहे सरकारी भ्रष्टाचार के बारे में वास्तव में क्या और कब पता था।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन पहले से ही रूस के साथ चल रहे भीषण युद्ध के कारण भारी दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में देश के भीतर से इस तरह के तीखे राजनीतिक हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है।

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युद्धकाल में चुनावों की उठी मांग
भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाने के साथ-साथ, फेडोरोव ने एक और बड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने देश में जल्द से जल्द 'युद्धकालीन चुनाव' (Wartime Elections) कराए जाने की जोरदार वकालत की है। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और जनता का भरोसा फिर से हासिल करने के लिए यह बेहद जरूरी है, भले ही देश युद्ध के संकट से जूझ रहा हो।
आमतौर पर युद्ध की स्थिति में किसी भी देश में चुनाव टाल दिए जाते हैं, और यूक्रेन में भी वर्तमान कानून के तहत मार्शल लॉ के दौरान चुनाव कराना प्रतिबंधित है। ऐसे में एक पूर्व कैबिनेट मंत्री द्वारा इस प्रकार की मांग रखना सीधे तौर पर राष्ट्रपति जेलेंस्की की लीडरशिप पर एक बड़ा राजनीतिक दबाव माना जा रहा है।
भ्रष्टाचार के मामलों पर क्या बोले पूर्व मंत्री?
बीबीसी के साथ बातचीत में मिखाइलो फेडोरोव ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के नागरिकों ने जिस उम्मीद के साथ सरकार चुनी थी, पारदर्शिता और जवाबदेही के मोर्चे पर कई स्तरों पर निराशा हाथ लगी है।
"यह समय सच का सामना करने का है। हमें यह जानना होगा कि सिस्टम के भीतर क्या चल रहा था और किसे किस बात की जानकारी थी। जनता पारदर्शी जवाब चाहती है।"
विश्लेषकों का मानना है कि यूक्रेन में पश्चिमी देशों से मिलने वाली अरबों डॉलर की सैन्य और वित्तीय सहायता के बाद से ही भ्रष्टाचार के मामलों पर पैनी नजर रखी जा रही है। सहयोगी देश भी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके द्वारा भेजा गया फंड सही जगह पहुँचे न कि भ्रष्ट अधिकारियों की जेब में जाए।
यूक्रेनी राजनीति पर इसके क्या होंगे प्रभाव?
इस बयान के बाद यूक्रेन की राजनीति में दो ध्रुव बनते नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां सरकार देश की सुरक्षा और रक्षा पर पूरा ध्यान केंद्रित करने की बात कह रही है, वहीं दूसरी तरफ आंतरिक असंतोष अब सतह पर आने लगा है।
- राजनीतिक अस्थिरता का खतरा: युद्ध के बीच इस प्रकार के अंदरूनी विवाद से देश की युद्ध क्षमता पर असर पड़ सकता है।
- पश्चिमी देशों का दबाव: अमेरिका और यूरोपीय देश लगातार यूक्रेन में पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया है।
- जनता की नाराजगी: लगातार बमबारी और आर्थिक तंगी के बीच भ्रष्टाचार की खबरें आम जनता का morale गिरा सकती हैं।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक और कड़ा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरखाने राजनीतिक दलों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में जेलेंस्की प्रशासन को इन सवालों के संतोषजनक जवाब देने होंगे, अन्यथा घरेलू मोर्चे पर उनकी मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।