स्वतंत्रता की 78वीं वर्षगांठ: राष्ट्रपति मुर्मू का देशवासियों के नाम प्रेरणादायक संदेश
भारत अपनी आजादी की 78वीं वर्षगांठ मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 15 अगस्त के ऐतिहासिक दिन से ठीक एक दिन पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने न केवल अतीत के संघर्षों को याद किया, बल्कि भविष्य के भारत की एक सशक्त तस्वीर भी पेश की।
स्वतंत्रता का महत्व और बलिदानों को नमन
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत देश और विदेश में बसे सभी भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर हार्दिक बधाई देते हुए की। उन्होंने उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की बेड़ियों को काटने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
'स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन इसे अक्षुण्ण बनाए रखना और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना आज की पीढ़ी का सामूहिक उत्तरदायित्व है।' - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
देश की प्रगति में हर नागरिक की भूमिका
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत की प्रगति केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों से संभव है। उन्होंने कहा कि:
- युवा शक्ति का योगदान: देश के युवाओं को नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसालें कायम करनी होंगी।
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के लिए हमें आत्मनिर्भरता के मार्ग पर और मजबूती से चलना होगा।
- सामाजिक एकता: विविधता में एकता ही भारत की असली शक्ति है, इसे हमें किसी भी कीमत पर बनाए रखना है।
'विकसित भारत' का संकल्प
संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का एक साझा सपना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हर नागरिक अपने छोटे-छोटे कार्यों में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेगा, तभी देश अपनी वास्तविक क्षमता को प्राप्त कर सकेगा।
महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास
राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में—चाहे वह रक्षा हो, विज्ञान हो या खेल—देश का नाम रोशन कर रही हैं। समावेशी विकास (Inclusive Growth) पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही हमारी असली सफलता है।
निष्कर्ष: एक नया आगाज
स्वतंत्रता का 78वां वर्ष न केवल जश्न का अवसर है, बल्कि आत्म-चिंतन का भी समय है। राष्ट्रपति का यह संदेश स्पष्ट है कि आने वाला समय भारत के लिए स्वर्णिम युग है, बशर्ते हम एकजुट होकर अपने कर्तव्यों का पालन करें। उन्होंने हर नागरिक से अपील की कि वे देश की तरक्की में एक सक्रिय भागीदार बनें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: राष्ट्रपति का संबोधन कब प्रसारित किया गया?
उत्तर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन 14 अगस्त, यानी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रसारित किया गया।
Q2: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में मुख्य रूप से किस बात पर जोर दिया?
उत्तर: उन्होंने देश की प्रगति, युवाओं की भूमिका, सामाजिक एकता और 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों के योगदान पर जोर दिया।
Q3: क्या यह संबोधन भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के बारे में है?
उत्तर: भारत इस वर्ष अपनी स्वतंत्रता की 78वीं वर्षगांठ मना रहा है। राष्ट्रपति का संदेश देश के विकास और भावी लक्ष्यों पर केंद्रित था।