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कौन हैं प्रो. तारिक मंसूर? जिन्हें बीजेपी ने राष्ट्रीय टीम में फिर दी बड़ी जिम्मेदारी

कौन हैं प्रो. तारिक मंसूर? जिन्हें बीजेपी ने राष्ट्रीय टीम में फिर दी बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय राजनीति के गलियारों में इस वक्त एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, और वो नाम है प्रोफेसर तारिक मंसूर का। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल करते हुए एक बार फिर से प्रो. तारिक मंसूर पर बड़ा दांव खेला है। उन्हें पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में बरकरार रखा गया है। आखिर कौन हैं प्रो. तारिक मंसूर, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की पिच से निकलकर बीजेपी की सियासत के शिखर तक उनका सफर कैसा रहा, और पार्टी ने उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी क्यों सौंपी है? आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में हर एक बात विस्तार से।

नितिन नबीन की नई टीम में बड़ा फेरबदल

भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक चुनावों और बदलावों के बीच पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम का खाका खींच दिया गया है। पार्टी संगठन में कई दिग्गजों की वापसी हुई है और कई नए चेहरों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और कद्दावर नेता राम माधव की पार्टी संगठन में वापसी हुई है, जिन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।

इन तमाम बड़े नामों के बीच सबसे ज्यादा ध्यान जिस चेहरे ने खींचा, वे हैं प्रो. तारिक मंसूर। जुलाई 2023 में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल में उन्हें पहली बार राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था। अब पार्टी की नई टीम में भी उन्हें यह पद देकर बीजेपी ने साफ संदेश दे दिया है कि पार्टी उनके संगठनात्मक और राजनीतिक कौशल से पूरी तरह संतुष्ट है।

कौन हैं प्रो. तारिक मंसूर? (An Academician Turned Politician)

राजनीति में आने से पहले प्रो. तारिक मंसूर का नाम देश के जाने-माने शिक्षाविदों और चिकित्सा विशेषज्ञों में शुमार होता रहा है। वह उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के 6 साल तक (मई 2017 से अप्रैल 2023 तक) कुलपति (Vice Chancellor) रहे हैं। एएमयू के वीसी पद से हटने के ठीक बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाया गया, जिससे तय हो गया था कि वह मुख्यधारा की राजनीति में लंबी पारी खेलने वाले हैं।

संघ परिवार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके संबंध काफी पहले से प्रगाढ़ रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान एएमयू के शताब्दी वर्ष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने को लेकर काफी राजनीतिक भूचाल आया था, लेकिन प्रो. मंसूर अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके अलावा, उनके बेटे की शादी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के शामिल होने की तस्वीरें भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सुर्खियों में रहीं थीं।

CAA-NRC विरोध और कैंपस में पुलिस का दखल

साल 2019 का वह दौर शायद ही कोई भूला हो जब देश भर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी को लेकर उथल-पुथल मची हुई थी। एएमयू का छात्र संघ और छात्र भी इस आंदोलन के केंद्र में थे। उस वक्त विश्वविद्यालय के वीसी के तौर पर प्रो. तारिक मंसूर ने कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को अंदर बुलाने का कड़ा कदम उठाया था। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब एएमयू कैंपस के भीतर पुलिस फोर्स को दाखिल होना पड़ा था। इस फैसले के कारण उन्हें छात्रों के एक धड़े के विरोध का भी सामना करना पड़ा था, लेकिन प्रशासनिक और वैचारिक दृढ़ता के मामले में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई।

पसमांदा मुसलमानों का बड़ा चेहरा और बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रो. तारिक मंसूर को पार्टी में इतनी बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे बीजेपी की सोची-समझी 'पसमांदा मुस्लिम रणनीति' है। प्रो. मंसूर मुसलमानों में कुरैशी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं, जो कि पसमांदा समुदाय के अंतर्गत आती है।

  • भारत के कुल मुस्लिम समाज में लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पसमांदा (पिछड़े और दलित) मुसलमानों का है।
  • महज 15 प्रतिशत हिस्सा ही उच्च जाति (अशरफ) के मुस्लिमों का माना जाता है।
  • आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा यह वर्ग लंबे समय से मुख्यधारा की राजनीति के हाशिए पर रहा है।

बीते कुछ वर्षों से बीजेपी लगातार पसमांदा समाज को अपने पाले में लाने के लिए विशेष अभियान चला रही है। प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने इसी बड़े समुदाय को एक मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संदेश देने का काम किया है।

विवादों से नाता और बेबाक अंदाज

प्रो. तारिक मंसूर सिर्फ एक राजनेता या प्रशासक नहीं, बल्कि अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते हैं। जब बीबीसी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक विवादित डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी, तब देश भर में इस पर बहस छिड़ी थी। ऐसे समय में प्रो. मंसूर ने खुलकर सामने आकर उस डॉक्यूमेंट्री की तीखी आलोचना की थी और उसे 'एजेंडा-संचालित पत्रकारिता' करार दिया था। उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में खासी सुर्खियां बटोरी थीं।

अनुसंधान, चिकित्सा और प्रशासनिक अनुभव का लंबा सफर

एएमयू की आधिकारिक वेबसाइट के आंकड़ों के अनुसार, राजनीति में आने से पहले प्रो. तारिक मंसूर अलीगढ़ के प्रतिष्ठित जवाहर नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर रह चुके हैं। उनके नाम चार दशकों के लंबे करियर में कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज हैं:

  • उनके नाम विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में 107 रिसर्च पब्लिकेशन दर्ज हैं।
  • उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान 58 पोस्ट ग्रेजुएट (PG) मेडिकल छात्रों की थीसिस का सफल पर्यवेक्षण किया है।
  • वर्ष 2023 के लिए प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्म पुरस्कार समिति' का सदस्य भी नामित किया गया था।
  • वह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के सदस्य, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM लखनऊ) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य और मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के शासी निकाय में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

निष्कर्ष

शिक्षा जगत से निकलकर वैचारिक प्रतिबद्धता और प्रशासनिक दक्षता के दम पर मुख्यधारा की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचे प्रो. तारिक मंसूर का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे राजनीतिक नियुक्तियों की फेरहिस्त देखता है, वहीं बीजेपी खेमे में उन्हें वैचारिक समन्वय और पसमांदा सशक्तिकरण का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उनकी यह भूमिका पार्टी के लिए कितनी फायदेमंद साबित होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: प्रो. तारिक मंसूर वर्तमान में बीजेपी में किस पद पर हैं?

Ans: प्रो. तारिक मंसूर को भारतीय जनता पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम में 'राष्ट्रीय उपाध्यक्ष' (National Vice President) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

Q2: प्रो. तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में किस पद पर रहे थे?

Ans: वह मई 2017 से अप्रैल 2023 तक पूरे 6 साल तक एएमयू के कुलपति (Vice Chancellor) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

Q3: प्रो. तारिक मंसूर किस समुदाय से आते हैं?

Ans: वह मुसलमानों के 'पसमांदा' वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, जो कि कुरैशी बिरादरी से आते हैं।

Q4: उन्हें राजनीति में कब और कैसे एंट्री मिली?

Ans: एएमयू के वीसी पद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाया गया था, जिसके बाद से वह सक्रिय राजनीति में हैं।

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रिपोर्टर: Tannu Upadhyay

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