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रंग दे बसंती: यूपी में दीवारों पर उतरी बदलती तस्वीर, युवाओं ने दिखाई कला

रंग दे बसंती: यूपी में दीवारों पर उतरी बदलती तस्वीर, युवाओं ने दिखाई कला

स्वतंत्रता दिवस का नया रंग: यूपी की सड़कों पर उकेरी गई विकास की गाथा

आजादी के 78वें पर्व की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश में देशभक्ति और रचनात्मकता का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए 'रंग दे बसंती' अभियान ने लखनऊ की सड़कों को एक नई पहचान दी है। यह केवल दीवारों पर पेंटिंग का कार्य नहीं है, बल्कि यह उन बदलावों की कहानी है, जिसे उत्तर प्रदेश के युवाओं ने अपने ब्रश और रंगों के जरिए जीवंत किया है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के बाहर दिखी कला की गूंज

राजधानी लखनऊ के सबसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में से एक, लखनऊ विश्वविद्यालय के पास स्थित सार्वजनिक दीवारों ने हाल ही में एक नया रूप ले लिया है। यहाँ एकत्रित हुए शहर के उभरते कलाकारों ने अपनी कलाकारी से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस ग्रैफिटी वॉल कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति (Creative Expression) के लिए एक खुला मंच प्रदान करना था।

'माफिया मुक्त' और विकसित यूपी का संदेश

इस अभियान की सबसे खास बात इसकी थीम रही—'माफिया मुक्त और बदलता उत्तर प्रदेश'। कलाकारों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से 2017 से पहले की स्थिति और वर्तमान में हुए सकारात्मक बदलावों के बीच का अंतर दिखाया है। इन चित्रों में:

  • अपराध और भय के माहौल से मुक्ति को दर्शाया गया है।
  • प्रदेश में आए बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) को प्रमुखता दी गई है।
  • युवाओं के सपनों और उज्ज्वल भविष्य की तस्वीर को रंगों में पिरोया गया है।

एक कलाकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम केवल दीवारें नहीं रंग रहे थे, हम एक नई पीढ़ी का विश्वास चित्रित कर रहे थे। पहले इन दीवारों पर पोस्टर और गंदगी होती थी, अब यहाँ विकास की कहानी लिखी है।"

युवाओं के लिए क्यों खास है यह पहल?

उत्तर प्रदेश सरकार का यह प्रयास युवाओं को राजनीति और समाज के प्रति जागरूक करने का एक सकारात्मक तरीका है। रचनात्मकता के माध्यम से जब युवा अपने प्रदेश के इतिहास और वर्तमान को समझते हैं, तो उनमें जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है। यह अभियान न केवल कलाकारों को पहचान दिला रहा है, बल्कि शहर के सौंदर्यीकरण में भी एक बड़ा योगदान दे रहा है।

बदलाव की बयार: एक नजर में

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास के मोर्चे पर आए बदलावों को आम जनता ने भी महसूस किया है। 'रंग दे बसंती' अभियान उसी जन-भावना को एक कलात्मक रूप दे रहा है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन दीवारों को देखना किसी भी नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: 'रंग दे बसंती' अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इस अभियान का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के युवाओं को रचनात्मक मंच देना और प्रदेश में आए सकारात्मक बदलावों को कला के माध्यम से प्रदर्शित करना है।

प्रश्न 2: यह अभियान कहाँ शुरू किया गया है?

उत्तर: फिलहाल इसकी शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय के पास की सार्वजनिक दीवारों से की गई है, और इसे अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जा सकता है।

प्रश्न 3: इस अभियान की थीम क्या है?

उत्तर: इस अभियान की मुख्य थीम 'माफिया मुक्त और बदलता उत्तर प्रदेश' है, जो 2017 के बाद आए बदलावों पर केंद्रित है।

स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर, यह 'रंग दे बसंती' अभियान न केवल दीवारों को सजा रहा है, बल्कि यह हर गुजरने वाले व्यक्ति को एक नए और विकसित उत्तर प्रदेश का एहसास करा रहा है। यह कला, संस्कृति और विकास का एक बेहतरीन मेल है।

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रिपोर्टर: Kavya Tripathi

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