क्या आपने कभी सोचा है कि राजधानी के एक साधारण से होटल में हुआ मामूली सा विवाद देश की सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा सकता है? उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में कुछ ऐसा ही हुआ है। होटल में हुई मामूली कहासुनी और मारपीट की एक शिकायत ने उस वक्त एक बड़े सनसनीखेज खुलासे का रूप ले लिया, जब पुलिस ने दो आरोपियों के पास से ऐसा जखीरा बरामद किया जिसे देख खाकी वर्दी वाले भी हैरान रह गए।
आइए जानते हैं कि आखिर इस पूरे मामले की परतें कैसे खुलीं और इसके पीछे कौन सा बड़ा फर्जीवाड़ा छिपा हुआ था।
होटल क्रिस्टेलिया में हुआ था हंगामा
घटना की शुरुआत 16 अगस्त को गोमतीनगर के विकासखंड-3 स्थित होटल 'क्रिस्टेलिया' से होती है। इस होटल में रहने वाले कुमार सर्वोत्तम पाठक ने स्थानीय थाने में एक सनसनीखेज शिकायत दर्ज कराई। पाठक के अनुसार, कुछ अज्ञात युवक अचानक होटल के अंदर घुस आए और उनके साथ बदसलूकी करने लगे।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने न केवल उनके साथ गाली-गलौज की, बल्कि उनका गला पकड़कर जान से मारने की धमकी भी दी। मामला सिर्फ यहीं नहीं रुका, आरोपियों ने पीड़ित के जरूरी दस्तावेजों के साथ भी छेड़छाड़ की। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।
पुलिस की रेड में मिला फर्जीवाड़े का 'अथाह समंदर'
जांच के दौरान जब पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी कर उन्हें दबोचा, तो उनके पास से जो बरामदगी हुई उसने सभी के होश उड़ा दिए। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान नोएडा के रहने والے 29 वर्षीय अभिनव सिंह और मेरठ के रहने वाले 29 वर्षीय शिवम चौहान के रूप में हुई है।
जब पुलिस ने इनके ठिकानों और सामान की तलाशी ली, तो उनके हाथ जो लगा वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। आरोपियों के पास से बरामद हुआ:
- भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) के नाम से बने कुल 478 फर्जी ID कार्ड
- 3 फर्जी आधार कार्ड
- 1 विदेशी ID कार्ड
- विदेश मंत्रालय का एक अन्य संदिग्ध ID कार्ड
- 14 विभिन्न बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड
- 2 बैंक चेकबुक और 1 भरा हुआ चेक
- 3 हाई-एंड स्मार्टफोन
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
लखनऊ पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराओं के तहत शिकंजा कसा है। पुलिस के मुताबिक, मामले में धारा 115(2), 127(2), 319(2), 333, 352, 351(3), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट की गहराई तक पहुंचा जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ाई: आखिर क्या था मकसद?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर विदेश मंत्रालय के नाम से इतने सारे फर्जी पहचान पत्र (ID Cards) क्यों छापे गए थे? क्या यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी रैकेट का हिस्सा है या इसके पीछे देश की सुरक्षा से जुड़ा कोई संवेदनशील मामला है? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए अब केवल स्थानीय पुलिस ही नहीं, बल्कि खुफिया और केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं।
सूत्रों की मानें तो यह फर्जी आईडी कार्ड देश के भीतर या विदेश भेजने के नाम पर भोले-भाले लोगों को ठगने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। इसके अलावा, वीआईपी एक्सेस या बॉर्डर पार करने जैसी गतिविधियों में भी इनके इस्तेमाल से इंकार नहीं किया जा सकता है।
आपराधिक इतिहास खंगाल रही है पुलिस
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट अब अभिनव सिंह और शिवम चौहान के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड को खंगालने में जुट गई है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनके इस नेटवर्क में उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। क्या इनके पास कोई प्रिंटिंग सेटअप था जहां ये फर्जी कार्ड तैयार करते थे, या फिर ये किसी बड़े सिंडिकेट के सिर्फ मोहरे मात्र हैं? इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस की आगामी जांच में सामने आएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. लखनऊ के गोमतीनगर होटल कांड में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान अभिनव सिंह (नोएडा) और शिवम चौहान (मेरठ) के रूप में हुई है।
2. आरोपियों के पास से क्या बरामद हुआ है?
आरोपियों के पास से विदेश मंत्रालय के नाम से बने 478 फर्जी ID कार्ड, आधार कार्ड, विदेशी ID, 14 बैंक कार्ड, चेकबुक और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
3. इस मामले की जांच कौन सी एजेंसियां कर रही हैं?
फिलहाल लखनऊ पुलिस इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन बरामदगी का दायरा बड़ा होने के कारण खुफिया और केंद्रीय जांच एजेंसियों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।