उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में पूर्व सैनिकों और वेटरन्स संगठनों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। मुगलसराय विधानसभा सीट पर जारी सियासी सरगर्मियों के बीच पूर्व सैनिकों के संगठन ने एक बड़ा फैसला लिया है। संगठन के जिलाध्यक्ष कैप्टन विजय नारायण सिंह ने जन सेवा दल के प्रत्याशी मुकेश शर्मा को अपना पूर्ण समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा की है।
संगठन के सदस्य के बेटे हैं मुकेश शर्मा
राजनीतिक गलियारों में इस समर्थन को बेहद खास माना जा रहा है। दरअसल, जन सेवा दल की ओर से चुनाव मैदान में उतरे मुकेश शर्मा हमारे वेटरन्स संगठन के सम्मानित सदस्य सूबेदार रामजी शर्मा के सुपुत्र हैं। अपने ही संगठन से जुड़े परिवार के युवा चेहरे को चुनावी दंगल में उतरते देख पूर्व सैनिकों ने एकजुटता दिखाने का निर्णय लिया है।
"हमारे साथी सूबेदार रामजी शर्मा के पुत्र मुकेश शर्मा जन सेवा दल के प्रत्याशी के रूप में जनता की सेवा का संकल्प लेकर मैदान में हैं। संगठन के सभी सम्मानित साथियों से नम्र निवेदन है कि वे मुकेश को अपना पूरा आशीर्वाद दें और अपने-अपने क्षेत्रों में उनके पक्ष में माहौल बनाएं।"
- कैप्टन विजय नारायण सिंह, जिलाध्यक्ष (वेटरन्स संगठन)
स्थानीय स्तर पर पूर्व सैनिकों का प्रभाव
मुगलसराय क्षेत्र में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। कैप्टन विजय नारायण सिंह की इस अपील के बाद स्थानीय चुनावी समीकरणों में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। संगठन के सभी सदस्यों और वेटरन्स परिवार से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे अपने-अपने इलाकों में जाकर मुकेश शर्मा के जनसंपर्क अभियान को मजबूती प्रदान करें।
पूर्व सैनिकों की एकजुटता से बढ़ा प्रत्याशी का हौसला
वेटरन्स संगठन द्वारा खुले तौर पर समर्थन मिलने के बाद प्रत्याशी मुकेश शर्मा और उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पूर्व सैनिकों का यह कदम केवल एक राजनीतिक समर्थन नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, सेवा भावना और आपसी एकजुटता का प्रतीक है।
- प्रत्याशी: मुकेश शर्मा (जन सेवा दल)
- संबद्धता: सूबेदार रामजी शर्मा के सुपुत्र
- समर्थनकर्ता: कैप्टन विजय नारायण सिंह (जिलाध्यक्ष) एवं समस्त वेटरन्स सदस्य
- क्षेत्र: मुगलसराय विधानसभा
अब देखना यह होगा कि पूर्व सैनिकों का यह एकजुट प्रयास मुगलसराय के चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है। लेकिन फिलहाल इस फैसले ने मुगलसराय की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।