"शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशाँ होगा..." कवि जगदंबा प्रसाद मिश्र 'हितैषी' की ये अमर पंक्तियां जब भी फिज़ाओं में गूंजती हैं, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। आज का दिन भारतीय सेना के उसी शूरवीर को याद करने का है, जिसने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जवानी और सांसें मातृभूमि के चरणों में न्योछावर कर दीं।
मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले, मरणोपरांत सेना मेडल से अलंकृत राइफलमैन मंदीप सिंह रावत का आज 8वां शहादत दिवस (अष्टम तिथि) है। इस पावन अवसर पर संपूर्ण राष्ट्र कृतज्ञता, गर्व और अश्रुपूरित आंखों से इस अमर शहीद को शत-शत नमन कर रहा है।
कर्तव्य की राह पर सर्वोच्च बलिदान
जब-जब भारत माता की आन, बान और शान पर संकट आया, तब-तब देश के जाबांज सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर तिरंगे की गरिमा को अक्षुण्ण रखा। राइफलमैन मंदीप सिंह रावत ने भी रणभूमि में अदम्य साहस का परिचय देते हुए यह सिद्ध किया कि एक सैनिक के लिए राष्ट्र सुरक्षा से बढ़कर कुछ भी नहीं होता।
सीमा पर दुश्मनों और आतंकियों की नापाक साजिशों का डटकर मुकाबला करते हुए उन्होंने अपने अंतिम सांस तक मातृभूमि का शीश झुकने नहीं दिया। उनके इस असाधारण पराक्रम और शौर्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत 'सेना मेडल' से अलंकृत किया था।
राष्ट्र का गौरव और आने वाली पीढ़ियों के प्रेरणास्रोत
शहीद मंदीप सिंह रावत की शहादत केवल उनके परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे 140 करोड़ देशवासियों के लिए गर्व का विषय है। उनका अदम्य साहस, अटूट राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यपरायणता आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बने रहेंगे।
सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक, आज देशवासी इस अमर सेनानी को याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि वीरों का यह त्याग ही है, जिसके कारण आज पूरा देश सुरक्षित और चैन की नींद सोता है।
स्वर्णाक्षरों में दर्ज अमर गाथा
आपने अपने कर्तव्य को जीवन से भी ऊपर रखा और यह सिद्ध कर दिया कि राष्ट्र सर्वोपरि है। आपका नाम भारत के वीरों की उस अमर गाथा में दर्ज है, जिसे समय की कोई लहर कभी मिटा नहीं सकती।
आज जब देश का तिरंगा शान से फहराता है, तो उसमें शहीद मंदीप सिंह रावत जैसे वीरों के बलिदान का रंग साफ झलकता है। शहादत के आठ साल बीत जाने के बाद भी उनका पराक्रम और अमर गाथा हर भारतीय के हृदय में हमेशा जीवित रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. राइफलमैन मंदीप सिंह रावत कौन थे?
राइफलमैन मंदीप सिंह रावत भारतीय सेना के एक वीर जवान थे, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें मरणोपरांत 'सेना मेडल' प्रदान किया गया था।
2. आज शहीद मंदीप सिंह रावत का कौन सा शहादत दिवस है?
आज अमर शहीद राइफलमैन मंदीप सिंह रावत जी का 8वां (अष्टम) शहादत दिवस है, जिस अवसर पर देश उन्हें नमन कर रहा है।
3. उन्हें किस वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
देश के प्रति उनके असाधारण शौर्य और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत प्रतिष्ठित 'सेना मेडल' (Sena Medal) से सम्मानित किया गया था।