झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एचईसी (HEC) के दिन बहुरने की उम्मीदें एक बार फिर जाग उठी हैं। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से कांके रोड स्थित उनके आवासीय कार्यालय में केंद्रीय संसदीय उप-समिति के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की है। बैठक का मुख्य एजेंडा किसी समय देश के औद्योगिक विकास की रीढ़ रहे इस कारखाने को संकट से उबारना और इसके पुनरुद्धार की ठोस रूपरेखा तैयार करना था।
कंगाल होती औद्योगिक इकाइयों को बचाने की कवायद
एचईसी झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य का एक बेहद अहम नाम रहा है। एक समय था जब इस कारखाने से निकलने वाले भारी उपकरण देश के नवरत्न उपक्रमों की ताकत बनते थे। हालांकि, वक्त के साथ कुप्रबंधन, वित्तीय संकट और अन्य वजहों से यह संस्थान अपनी चमक खोता चला गया। अब इसके अस्तित्व को बचाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर गंभीर प्रयास शुरू हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में एचईसी की वर्तमान दयनीय स्थिति का कच्चा-चिट्ठा सामने रखा गया। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर मैराथन चर्चा हुई:
- वित्तीय संकट से उबारना: कारखाने के कर्मचारियों के बकाये वेतन और संयंत्र के आधुनिकीकरण के लिए फंड जुटाने की रणनीति।
- उत्पादन क्षमता का विस्तार: बंद पड़ी मशीनों को दोबारा शुरू करना और रक्षा एवं अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों के लिए नए ऑर्डर हासिल करना।
- भूमि उपयोग और प्रबंधन: एचईसी की विशाल जमीन के सही इस्तेमाल के जरिए राजस्व बढ़ाने के विकल्प।
- स्थानीय रोजगार की सुरक्षा: कारखाने के पुनर्जीवित होने से झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना।
दिग्गज सांसदों की मौजूदगी ने बढ़ाई उम्मीदें
यह बैठक इसलिए भी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से आए दिग्गज सांसद शामिल थे। केंद्रीय संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा की अगुवाई में इस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के साथ मंत्रणा की। बैठक में शामिल प्रमुख चेहरों में:
- राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा (समिति के अध्यक्ष)
- झारखंड के युवा सांसद विजय हांसदा
- राज्यसभा सांसद सुलता देव
- लोकसभा सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी
- सांसद हँसमुखभाई सोमाभाई पटेल
- सांसद चंदन चौहान
इन सभी जनप्रतिनिधियों ने एचईसी के ग्राउंड जीरो का आकलन करने के बाद अपनी रिपोर्ट और सुझाव मुख्यमंत्री के सामने रखे।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का रुख
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार एचईसी के पुनरुद्धार के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक कारखाना नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और औद्योगिक इतिहास का अहम हिस्सा है। इसे बचाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव सहयोग करने को तैयार है। मुख्यमंत्री ने समिति के सदस्यों के साथ खुलकर उन तमाम बाधाओं पर चर्चा की जो पिछले कई वर्षों से इस संस्थान के रास्ते का कांटा बनी हुई हैं।
आगे की राह और क्या हैं चुनौतियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि एचईसी जैसी भारी-भरकम इकाइयों को चलाना अब केवल कागजी बैठकों तक सीमित नहीं रह सकता। इसके लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना (Time-bound Action Plan) की आवश्यकता है। केंद्रीय संसदीय उप-समिति की यह रिपोर्ट संसद में पेश की जाएगी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार की ओर से एक बड़े वित्तीय पैकेज या पुनरुद्धार नीति की घोषणा की जा सकती है।
स्थानीय श्रमिक संघों और आम जनता की नजरें भी अब इस बैठक के नतीजों पर टिकी हैं। यदि यह योजना जमीन पर उतरती है, तो रांची के औद्योगिक बाजार में एक बार फिर से रौनक लौट सकती है और हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्ना 1: एचईसी (HEC) क्या है और यह कहां स्थित है?
उत्तर: हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC) एक भारी उद्योग का कारखाना है जो झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा इलाके में स्थित है। इसे भारत के पहले भारी इंजीनियरिंग संयंत्रों में गिना जाता है।
प्रश्ना 2: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन और केंद्रीय समिति के बीच बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से घाटे में चल रहे एचईसी कारखाने का पुनरुद्धार करना, उसकी मौजूदा चुनौतियों को दूर करना और भविष्य की विकास योजनाओं पर सहमति बनाना था।
प्रश्ना 3: इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: इस 6 सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति की अध्यक्षता राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा ने की, जिसमें कई अन्य राज्यों के सांसद भी शामिल थे।