दुनिया के सबसे बड़े कॉरपोरेट साम्राज्यों में शुमार होने वाली कंपनियों का पतन अक्सर उतनी ही तेजी से होता है, जितनी तेजी से वे आसमान छूती हैं। चीन की दिग्गज रियल एस्टेट कंपनी 'एवरग्रैंड' (Evergrande) के संस्थापक हुइ का यान की कहानी इसका सबसे ताजा और खौफनाक उदाहरण है। एक समय ऐसा था जब हुइ का यान को चीन का 'सुब्रत रॉय सहारा' कहा जाता था—दौलत, रुतबा, भव्य जीवनशैली और राजनीतिक रसूख के मामले में उनका कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन आज उनकी जिंदगी एक अंधेरी कोठरी में सिमट कर रह गई है।
शुरुआत: गरीबी से निकलकर चीन के सबसे अमीर शख्स बनने का सफर
हुइ का यान की शुरुआती जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनका जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में ही सिर से मां का साया उठ गया था और उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया। तंगी इतनी थी कि स्कूल की फीस भरने तक के लाले पड़े रहते थे।
लेकिन हुइ की महत्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी मेहनत और तेज दिमाग के दम पर चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रखा। साल 1996 में उन्होंने 'एवरग्रैंड ग्रुप' की नींव रखी। उस वक्त चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही थी और शहरों का आधुनिकीकरण हो रहा था। हुइ का यान ने इस मौके को भांप लिया और देखते ही देखते उनकी कंपनी चीन की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी डेवलपर बन गई।
सुब्रत रॉय सहारा से क्यों की जाती है तुलना?
भारत में सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की तरह ही हुइ का यान भी अपनी भव्यता और विलासिता के लिए जाने जाते थे। जिस तरह सहारा के पास देश-विदेश में संपत्तियां, मीडिया हाउस और आलीशान प्रोजेक्ट्स थे, लगभग वैसा ही साम्राज्य हुइ का यान ने चीन में खड़ा किया था।
- राजनीतिक और सामाजिक रसूख: हुइ का यान केवल एक व्यवसायी नहीं थे, बल्कि वे कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर भी मजबूत पकड़ रखते थे।
- विलासितापूर्ण जीवन: उनके पास प्राइवेट जेट्स, लग्जरी यॉट और दुनिया भर में बेशकीमती इमारतें थीं।
- खेलों में निवेश: सुब्रत रॉय की तरह ही हुइ का यान को भी खेलकूद का शौक था। उन्होंने चीन के फुटबॉल क्लब गुआंगज़ौ एवरग्रैंड पर पानी की तरह पैसा बहाया और उसे एशिया का सबसे बेहतरीन क्लब बना दिया।
अहंकार और अंधाधुंध कर्ज: पतन की शुरुआत
हर बुलबुले की एक सीमा होती है। हुइ का यान का साम्राज्य भी कर्ज की बुनियाद पर खड़ा था। एवरग्रैंड ने अपने विस्तार के लिए बैंकों और निवेशकों से खरबों डॉलर का कर्ज ले लिया। कंपनी का मानना था कि चीन का रियल एस्टेट बाजार कभी धीमा नहीं पड़ेगा।
लेकिन साल 2020 के बाद चीनी ड्रैगन की चाल बदली। शी जिनपिंग सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों के बेहिसाब कर्ज पर लगाम कसने के लिए नए नियम (थ्री रेड लाइन्स) लागू किए। इसके बाद एवरग्रैंड का ताश का पत्तों सा महल ढहने लगा। कंपनी पर कुल 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा का कर्ज हो गया, जो दुनिया भर में किसी भी रियल एस्टेट कंपनी पर सबसे बड़ा कर्ज था।
अब क्या है हुइ का यान का हाल?
वित्तीय धांधलियों, निवेशकों को धोखा देने और भारी फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद चीनी प्रशासन ने हुइ का यान पर शिकंजा कस दिया। उन्हें नजरबंद किया गया और बाद में कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें गंभीर सजा सुनाई गई। आज उनकी कुल संपत्ति जो कभी अरबों डॉलर हुआ करती थी, वह खत्म हो चुकी है और उनका साम्राज्य दिवालिया घोषित हो चुका है।
यह कहानी सिर्फ एक कारोबारी के पतन की नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि बिना ठोस वित्तीय अनुशासन के खड़ा किया गया भव्य साम्राज्य कितनी जल्दी नेस्तनाबूद हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. हुइ का यान कौन हैं?
हुइ का यान चीनी रियल एस्टेट कंपनी 'एवरग्रैंड ग्रुप' के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन हैं। एक समय वे एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाते थे।
2. एवरग्रैंड कंपनी क्यों डूबी?
एवरग्रैंड कंपनी अत्यधिक कर्ज (लगभग 300 अरब डॉलर) और चीनी सरकार द्वारा रियल एस्टेट सेक्टर पर कड़े नियम लागू किए जाने के कारण डूबी।
3. हुइ का यान की तुलना सुब्रत रॉय सहारा से क्यों की जाती है?
दोनों ही दिग्गजों ने बहुत कम संसाधनों से शुरू करके विशाल व्यावसायिक साम्राज्य खड़े किए, अपनी भव्य जीवनशैली के लिए जाने गए और अंततः भारी वित्तीय संकट व कानूनी कार्रवाई के घेरे में आए।