क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में पक्षियों की भी कोई भूमिका हो सकती है? भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संस्कृति और प्रकृति के जरिए रिश्तों को कैसे मजबूत किया जाता है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNOG) के प्रांगण में अब भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर की गूंज और सुंदरता देखने को मिलेगी। भारत ने यूएनओजी को पांच शानदार मोर भेंट करके दशकों पुरानी एक बेहद खूबसूरत परंपरा को फिर से जिंदा कर दिया है।
सफेद मोर ने खींचा सबका ध्यान: क्या है इस तोहफे की खासियत?
शुक्रवार को जिनेवा में आयोजित एक विशेष और बेहद गरिमामयी समारोह में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, अरिंदम बागची ने औपचारिक रूप से ये पांचों मोर यूएनओजी की महानिदेशक टाटियाना वालोवाया को सौंपे। इस मौके पर भारत की समृद्ध प्राकृतिक विरासत और बहुपक्षीय सहयोग के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।
खास बात यह है कि इन पांच युवा मोरों में चार पारंपरिक नीले मोर हैं, जबकि पांचवां एक दुर्लभ सफेद पंखों वाला नर मोर है। इन मोरों के नीले और सफेद रंगों का मेल संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रंगों से भी मेल खाता है, जो इस भेंट को और भी प्रतीकात्मक बनाता है।
43 साल पुराना इतिहास और इंदिरा गांधी की याद
भारत द्वारा जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को मोर भेंट करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले ठीक ऐसा ही ऐतिहासिक क्षण 1981 में आया था। उस समय देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों का एक प्रजनन जोड़ा यूएनओजी को भेजा था। अब, 43 साल बाद उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारत ने इस साझेदारी को और प्रगाढ़ किया है।
भारतीय दूतावास की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है, "भारतीय मोर सुंदरता, गरिमा और मजबूती का प्रतीक है। यह कदम जैव विविधता के संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"
कहाँ रहेंगे ये नए मेहमान? एरियाना पार्क का खुलेगा नया आशियाना
जिनेवा बायोपार्क चिड़ियाघर के निदेशक टोबियास ब्लाहा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह इन पक्षियों के लिए एक आदर्श स्थान है। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना बनाई गई है:
- शुरुआती देखभाल: मोरों को पहले लगभग तीन महीने तक एक सुरक्षित परिसर में रखा जाएगा ताकि वे नए वातावरण के अनुकूल ढल सकें।
- खुला माहौल: इसके बाद उन्हें जिनेवा के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित, 46 हेक्टेयर में फैले ऐतिहासिक 'एरियाना पार्क' में खुले रूप में घूमने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र परिसर में इन मोरों के आने से न केवल वहां की जैव विविधता में इजाफा होगा, बल्कि दुनिया भर से आने वाले राजनयिकों और पर्यटकों को भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की एक अनूठी झलक भी देखने को मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा कार्यालय को कुल कितने मोर दिए हैं?
उत्तर: भारत ने कुल 5 मोर भेंट किए हैं, जिनमें 4 नीले मोर और 1 दुर्लभ सफेद पंखों वाला नर मोर शामिल है।
Q2. इससे पहले भारत ने जिनेवा में मोर कब भेजे थे?
उत्तर: इससे पहले वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिल्ली चिड़ियाघर से मोरों का एक जोड़ा जिनेवा भेजा था।
Q3. इन मोरों को जिनेवा में कहाँ रखा जाएगा?
उत्तर: शुरुआती तीन महीने सुरक्षित परिसर में रखने के बाद इन्हें 46 हेक्टेयर में फैले प्रसिद्ध एरियाना पार्क में खुले में छोड़ा जाएगा।