सोशल मीडिया दिग्गज मेता (Meta) और इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क ज़करबर्ग के लिए भारत में कानूनी मुसीबतें बढ़ सकती हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से आई एक बड़ी खबर के अनुसार, ज़करबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्स एब्यूज मैटेरियल (CSAM) और संचालन संबंधी कमियों के लिए 'माफी' मांगी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर बेहद सख्त रुख अपनाया है।
सरकार का बड़ा बयान: 'इंटरमीडियरी' नहीं है मेता!
सरकारी सूत्रों का कहना है कि मेता को अब कानून के तहत 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) की परिभाषा के दायरे में नहीं माना जा सकता। यह बयान भारत सरकार के रुख में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अगर मेता से 'इंटरमीडियरी' का दर्जा छीन लिया जाता है, तो कंपनी को मिलने वाला 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) का सुरक्षा कवच खत्म हो जाएगा।
"प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट की जिम्मेदारी से बचने का दौर अब खत्म हो रहा है। अगर बाल यौन शोषण जैसी गंभीर सामग्री पर नकेल नहीं कसी गई, तो कानूनी छूट का कोई औचित्य नहीं रहता।" - सरकारी सूत्र
आखिर क्या है 'सेफ हार्बर' और इसका असर?
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 'इंटरमीडियरी' के रूप में सेफ हार्बर का संरक्षण मिलता है। इसका मतलब यह है कि यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी आपत्तिजनक या गैर-कानूनी कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
लेकिन यदि सरकार मेता को इंटरमीडियरी नहीं मानती है, तो:
- मेता पर प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए किसी भी गैर-कानूनी कंटेंट के लिए आपराधिक मामले दर्ज हो सकेंगे।
- कंपनी और उसके अधिकारियों को सीधे अदालत में जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
- चाइल्ड एब्यूज और सुरक्षा में चूक पर भारी जुर्माना और सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ज़करबर्ग की माफी और ऑपरेशनल गलतियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्क ज़करबर्ग ने प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के सुरक्षा संबंधी मामलों और इसके संचालन में हुई गंभीर मानवीय व तकनीकी गलतियों को स्वीकार किया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी मेता लंबे समय से अपने एल्गोरिदम और सेफ्टी प्रोटोकॉल को लेकर वैश्विक स्तर पर आलोचना झेल रही है।
भारतीय यूजर्स और बिग टेक के लिए क्या मायने हैं?
भारत मेता के लिए दुनिया का सबसे बड़ा यूजर बेस वाला बाजार है। ऐसे में भारत सरकार का यह आक्रामक रुख अन्य 'बिग टेक' (Big Tech) कंपनियों जैसे गूगल, एक्स (पूर्व में ट्विटर) के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है। टेक विशेषज्ञों का मानना है कि अब विदेशी कंपनियों को भारतीय कानूनों का पूरी तरह पालन करना होगा और डिजिटल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर मेता की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सरकार के इस कड़े संकेत ने सोशल मीडिया इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है।