सावन का महीना किस तरह बादलों की गर्जना और मूसलाधार बारिश के साथ बीत रहा है? कैलेंडर के पन्नों पर नजर डालें तो आधा सावन पानी में ही गुजर चुका है, लेकिन मौसम का मिजाज देखकर लगता है कि बादलों का यह गुस्सा अभी थमने वाला नहीं है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जो ताजा अपडेट जारी किया है, उसके मुताबिक मानसून का यह जोश सावन के बचे हुए दिनों के साथ-साथ आने वाले भादो के महीने में भी पूरी तरह हाई रहने वाला है। यानी कुल मिलाकर कहें तो झमाझम बारिश का दौर अभी लंबी पारी खेलने के मूड में है।
आखिर अचानक मौसम में इतनी बड़ी तब्दीली क्यों आई है और कौन से ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से देश के एक-बड़े हिस्से में आसमान से आफत बरस रही है? आइए जानते हैं इस विस्तृत रिपोर्ट में कि आपके राज्य में अगले कुछ दिनों तक मौसम का हाल कैसा रहने वाला है।
तीन एक्टिव मानसूनी सिस्टम्स का असर, बंगाल की खाड़ी से आ रही है नमी
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो इस वक्त एक साथ तीन बड़े मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) और मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसक कर बेहद मजबूत स्थिति में हैं। इसके साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ से हवाओं के जरिए भारी मात्रा में नमी (Moisture) देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रही है।
इसी का नतीजा है कि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के राज्यों में बादलों का डेरा जमा हुआ है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस सक्रियता के चलते देश में इस सीजन में बारिश की जो थोड़ी-बहुत कमी (Deficit) चल रही थी, वह भी बहुत जल्द पूरी हो जाएगी।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में पानी का हाहाकार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लेकर सूबे के कई अन्य जिलों तक बारिश ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। भोपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते स्कूलों में तीन दिनों तक अवकाश घोषित करना पड़ा। हालात यह हैं कि अकेले भोपाल में करीब 9 इंच तक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे निचले इलाकों के लगभग 200 घरों में ढाई फीट तक पानी भर गया। नदी-नालों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर बह रहा है।
उधर, राजस्थान का हाल भी कुछ ऐसा ही है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा और बूंदी जैसे जिलों में बादलों ने जमकर कहर बरपाया है। चित्तौड़गढ़ के गंगरार में तो 8 इंच तक बारिश रिकॉर्ड की गई। राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से लगभग 300 बीघा उपजाऊ फसल बर्बाद हो गई है। सबसे हैरान करने वाली तस्वीर कोटा से आई, जहां मशहूर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की एक टनल के अंदर 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। इस जलभराव के कारण एक्सप्रेस-वे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और गाड़ियां रेंग-रेंग कर चलती नजर आईं।
उत्तर प्रदेश और पहाड़ी राज्यों में भी आफत की बारिश
देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में भी मानसून अपने पूरे तेवर में है। जेवर स्थित निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के परिसर में भारी जलभराव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वहीं, धार्मिक नगरी वाराणसी में मां गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण प्रसिद्ध घाटों की सीढ़ियां पूरी तरह डूब चुकी हैं। पानी घाटों के ऊपर बने मंदिरों तक पहुंच गया है, जिसके चलते मजबूरन लोगों को अब सीढ़ियों पर ही अंतिम संस्कार करने पड़ रहे हैं।
पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन (Landslide) के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बुधवार को अकेले हिमाचल में 313 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद करनी पड़ीं। जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां लगातार बारिश के चलते सलाल बांध के कई गेट खोलने पड़े हैं। वहीं, मायानगरी मुंबई के घाटकोपर इलाके में लैंडस्लाइड की घटना से एक और शव बरामद किया गया है, जिससे प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा बारिश वाले प्रमुख इलाके
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में देश के विभिन्न हिस्सों में बादलों ने जमकर पानी बरसाया है। आइए एक नजर डालते हैं उन टॉप इलाकों पर जहां सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई:
- पश्चिमी मध्य प्रदेश: गोगावां (खरगोन) - 9 इंच
- पूर्वी राजस्थान: गंगरार (चित्तौड़गढ़) - 8 इंच
- गुजरात क्षेत्र: पणम बांध (महिसागर) - 8 इंच
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: बिजनौर - 6 इंच
- मध्य महाराष्ट्र: गगनबावड़ा (कोल्हापुर) - 5 इंच
- असम: डिब्रूगढ़ - 4 इंच
- हरियाणा: साढौरा (यमुनानगर) - 4 इंच
- पश्चिमी राजस्थान: जायल - 4 इंच
- कोंकण: वसई (पालघर) - 4 इंच
आम जनता के लिए जरूरी सलाह
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले इलाकों या नदी-नालों के पास जाने से बचें। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को खासतौर पर सतर्क रहने की हिदायत दी गई है क्योंकि पहाड़ों पर किसी भी वक्त अचानक भूस्खलन हो सकता है। यदि आप किसी ऐसे इलाके में हैं जहां लगातार भारी बारिश हो रही है, तो अपने बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें और प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या भादो के महीने में भी मानसून ऐसा ही सक्रिय रहेगा?
हां, मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसूनी ट्रफ और कम दबाव के क्षेत्रों के सक्रिय रहने के कारण भादो के महीने में भी देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश की पूरी उम्मीद है।
2. किन राज्यों में फिलहाल सबसे ज्यादा बारिश हो रही है?
वर्तमान में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा रही है।
3. क्या अत्यधिक बारिश के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है?
हां, राजस्थान के कई जिलों (जैसे कोटा और चित्तौड़गढ़) में बांध टूटने और जलभराव के कारण सैकड़ों बीघा फसलें खराब होने की खबरें सामने आई हैं।