विंध्य एक्सप्रेस वे का कड़ा विरोध मर जाएंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे चंदौली में किसानों का आंदोलन हुआ और तेज
चंदौली (उत्तर प्रदेश) | 16 जुलाई 2026
विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के खिलाफ चंदौली के बिछिया में चल रहा किसानों का अनिश्चितकालीन धरना अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में गठित 'किसान संघर्ष मोर्चा' अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अडिग है। आंदोलन को धार देने के लिए किसानों ने अब एक अनोखी और संगठित रणनीति तैयार की है, जिसके तहत हर दिन एक अलग गांव के किसान धरने की कमान संभालेंगे।
👉बारी-बारी से गांव संभालेंगे धरने की कमान
भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता और किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी ने बताया कि आंदोलन को और अधिक संगठित और मजबूत किया जा रहा है।
मोर्चे की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि धरने को सुचारू रूप से चलाने के लिए रोजाना एक-एक गांव के लोग मंच का संचालन करेंगे। इसी क्रम में आज अदसण ग्राम सभा के किसानों ने मंच संभाला।
⚡24 घंटे के क्रमिक अनशन पर बैठे ये किसान:
अदसण ग्राम सभा से पांच किसान—विजेंद्र, अरुण कुमार सिंह, अमित कुमार, हरिहर और बैजनाथ—अगले 24 घंटे के लिए क्रमिक धरने पर बैठ गए हैं।
👉ईस्ट इंडिया कंपनी जैसा राज, छीन रहे हमारे पूर्वजों की जमीन"
अदसण ग्राम सभा के आक्रोशित किसानों ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। किसानों का कहना है:
- ⚡कम बची है जमीन: पीढ़ियों से बंटवारा होते-होते अब किसानों के पास महज एक या दो बीघा जमीन ही बची है।
- ⚡अस्तित्व का संकट: अगर सरकार जबरन इस बची-कुची जमीन का भी अधिग्रहण कर लेगी, तो किसान और उनका परिवार भूखों मर जाएगा।
- ⚡तुलना: किसानों ने इस जबरन भूमि अधिग्रहण की तुलना 'ईस्ट इंडिया कंपनी' के दमनकारी शासन से की है।
👉एक मुट्ठी अनाज से मिल रहा है आंदोलन को समर्थन
इस आंदोलन को क्षेत्र के दर्जनों गांवों का भारी जनसमर्थन मिल रहा है। एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए ग्रामीण अपने घरों से एक-एक मुट्ठी अनाज धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के लिए भेज रहे हैं।
👉समर्थन देने वाले प्रमुख गांव:
- पीपरपतिया, फत्तेपुरकला, काँटा, परेवा
- खुरुहूजा, पड़्या, सोनडेहरा, भतीजा
- विजयनारायणपुर, हथियानी और अन्य समीपवर्ती ग्रामीण इलाके।
बारी-बारी से इन सभी गांवों के किसान आने वाले दिनों में धरने पर बैठेंगे और मंच का संचालन करेंगे। किसानों का एक ही साफ नारा है—"मर जाएंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।"
👉धरने पर मौजूद रहे प्रमुख किसान
आज के प्रदर्शन और बैठक के दौरान मुख्य रूप से गोपाल सिंह, विनोद चौहान, मनोज सिंह, राम दुलारे कन्नौजिया, संदीप सिंह, मनोज कुमार सिंह, राजेश सिंह, राज कुमार, ऋषिमुनी सहित पचासों की संख्या में किसान मुस्तैद रहे।