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यूपी में बारिश का तांडव: काशी के 84 घाट डूबे, छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार

यूपी में बारिश का तांडव: काशी के 84 घाट डूबे, छतों पर हो रहा अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश में मानसून का तीसरा और सबसे आक्रामक दौर शुरू हो चुका है। बादलों की लगातार आवाजाही और मूसलाधार बारिश ने सूबे के कई जिलों में जनजीवन को पूरी तरह से थाम दिया है। आलम यह है कि नदियां अपने उफान पर हैं और मैदानी इलाकों से लेकर धार्मिक नगरियों तक पानी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कुल 66 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिनमें से 29 जिले ऐसे हैं जहां भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इस कुदरती आफत के बीच करीब 13 जिलों में बाढ़ जैसे भयानक हालात बन गए हैं, जिससे एक लाख से अधिक आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।

काशी में गंगा का रौद्र रूप: डूबे सभी 84 घाट, छतों पर हो रही आरती और अंतिम संस्कार

धर्मनगरी वाराणसी (काशी) में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण इतिहास में एक बार फिर दुर्लभ और डरावने दृश्य देखने को मिल रहे हैं। गंगा के उफान के चलते शहर के सभी 84 घाट पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। प्रसिद्ध नमो घाट से लेकर अस्सी घाट तक पानी का कब्जा है। स्थिति यह है कि कभी जहां पर्यटक बैठकर सुकून के पल बिताते थे और दुकानें सजा करती थीं, वहां अब नावें चलाई जा रही हैं।

विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की भव्य गंगा आरती को अब मजबूरन घाट के ऊंचे हिस्सों और छतों पर शिफ्ट करना पड़ा है। शहर के लगभग 100 छोटे-बड़े मंदिरों के गर्भगृह तक में गंगा का पानी घुस चुका है। सबसे मर्मस्पर्शी और विचलित करने वाली तस्वीरें मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट से आ रही हैं, जहां अंतिम संस्कार के लिए जमीन नहीं बची है। मजबूरी में हरिश्चंद्र घाट पर सीढ़ियों और गलियों में तो वहीं मणिकर्णिका घाट पर छतों पर मुर्दों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है.

प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर, 13 जिलों में बाढ़ का संकट

प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से गुजरने वाली सभी प्रमुख नदियां इस समय उफान पर हैं और कई जगहों पर इन्होंने खतरे के निशान को पार कर लिया है:

  • घाघरा नदी: बाराबंकी और अयोध्या में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
  • गंगा नदी: बदायूं, बलिया और कानपुर के कुछ हिस्सों में उफान पर है।
  • शारदा नदी: लखीमपुर खीरी में इसने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।
  • टोंस और मंदाकिनी: प्रयागराज में टोंस और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है।

राहत और बचाव कार्य के लिए जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है।

कानपुर और प्रयागराज में बढ़ी धड़कनें, प्रशासन अलर्ट मोड पर

औद्योगिक नगरी कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु (114 मीटर) के बेहद करीब पहुंच चुका है, जबकि यहां खतरे का निशान 115 मीटर पर है। शुक्लागंज में भी जलस्तर 112 मीटर को पार कर गया है। खतरे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित होने वाले 176 गांवों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। सुरक्षा के मद्देनजर 35 नई पुलिस चौकियां बनाई गई हैं और 36 सदस्यीय एनडीआरएफ टीम के साथ 100 ट्रेंड गोताखोर तैनात किए गए हैं।

उधर, तीर्थराज प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। रसूलाबाद से नागवासुकी मंदिर जाने वाली मुख्य रिवर फ्रंट रोड पूरी तरह डूब चुकी है। प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर के कॉरिडोर तक गंगा का पानी पहुंच गया है। शहर के निचले इलाकों में जलभराव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है, जहां डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को फटकार लगाई है, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के बाढ़ प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

चित्रकूट से मिर्जापुर तक तबाही, कब राहत मिलेगी?

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी सीधे बाजारों और मुख्य सड़कों पर बह रहा है, जिससे वहां नावें चलने लगी हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मशहूर 'गुप्त गोदावरी' की दोनों गुफाओं को फिलहाल पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। मिर्जापुर में विंध्याचल धाम के प्रसिद्ध घाट पूरी तरह पानी में समा चुके हैं। कानपुर के बर्रा इलाके में पांडु नदी के उफान से घरों के अंदर पानी भर गया है, जिससे लोग छत पर रात बिताने को मजबूर हैं।

25 अगस्त तक जारी रहेगा बारिश का दौर

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से आ रही नम दक्षिण-पश्चिमी हवाओं और मानसून ट्रफ की सक्रियता के कारण उत्तर प्रदेश में बादलों का यह डेरा अभी कुछ और दिन रहेगा। मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान बताता है कि 25 अगस्त तक पूरे प्रदेश में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश का यह सिलसिला जारी रहेगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले या नदी के तटीय इलाकों में न जाएं और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

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Tannu Upadhyay

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Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय Senior Sub Editor हैं और कंटेंट रिव्यू, स्टाइल गाइड कम्प्लायंस और डेली न्यूज़ अपडेट्स को मैनेज करती हैं। 180+ पब्लिश्ड पोस्ट्स के साथ ...

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