बिहार की राजधानी पटना में राजनीति का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मौका था राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 'लोकभवन मार्च' का, जो देखते ही देखते रणक्षेत्र में बदल गया। छात्रों की समस्याओं, बढ़ती बेरोजगारी और सिवान में हुई कथित गोलीबारी जैसी घटनाओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। इस दौरान राज्य के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पुलिस ने हिरासत ले लिया, जिसके बाद पटना की सड़कों पर सियासी भूचाल आ गया है।
डाकबंगला चौराहे पर उमड़ी भीड़, तोड़े गए बैरिकेड्स
तय कार्यक्रम के अनुसार, राजद कार्यकर्ताओं को लोकभवन तक मार्च करना था। इसे रोकने के लिए पटना प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। डाकबंगला चौराहे पर भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ मजबूत बैरिकेडिंग और बांस के घेरे बनाए गए थे। लेकिन, जोश से लबरेज RJD कार्यकर्ताओं ने पुलिस के तमाम सुरक्षा इंतजामों को धत्ता बता दिया।
जैसे ही तेजस्वी यादव और पार्टी के अन्य दिग्गज नेता वहां पहुंचे, माहौल गरमा गया। कई उत्साही समर्थक बैरिकेड्स पर कूद पड़े और पुलिस बैरियर को पार करने की कोशिश करने लगे। हालात को बेकाबू होते देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (वज्र वाहन) का इस्तेमाल किया। सड़क पर चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
छात्रों के मुद्दे और AK-47 का कटआउट बना चर्चा का विषय
यह पूरा प्रदर्शन सिर्फ राजनीतिक नहीं था, बल्कि इसके केंद्र में छात्र और उनके ज्वलंत मुद्दे थे। प्रदर्शन के दौरान राजद कार्यकर्ता अपने साथ AK-47 का बड़ा सा कटआउट लेकर पहुंचे थे, जिसने सबका ध्यान खींचा। यह विरोध मुख्य रूप से सिवान में हुई गोलीबारी की घटना और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की TRE-4 परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के विरोध में था।
छात्रों का एक बड़ा वर्ग पहले से ही आंदोलन की राह पर है। उनकी मांग है कि BPSC परीक्षा की प्रीलिम्स और मेंस प्रक्रिया से नेगेटिव मार्किंग के प्रावधान को तुरंत वापस लिया जाए। छात्रों का कहना है कि यह नियम उनके भविष्य के साथ एक प्रकार का खिलवाड़ है।
तेजस्वी यादव और मीसा भारती के तीखे तेवर
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई सीधे तौर पर सम्राट चौधरी के इशारे पर की जा रही है।
"सरकार चाहे जितनी भी ताकत लगा ले, हमारी आवाज को दबा नहीं सकती। आज जनता सड़कों पर है और वह सरकार की इन दमनकारी नीतियों का करारा जवाब देगी। जनता सब जानती है।" - तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार
वहीं, इस मार्च में शामिल हुईं राजद सांसद मीसा भारती ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को माना है कि छात्रों के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल किया गया। हम पूछना चाहते हैं कि आखिर इसकी अनुमति किसने दी थी? यदि डीएम (DM) ने इसकी अनुमति दी है, तो उन्हें भी तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए। बिहार सरकार युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।"
यातायात व्यवस्था प्रभावित, वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल
इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामे के मद्देनजर पटना ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता की सुविधा के लिए पहले ही एडवाइजरी जारी कर दी थी। पटना जंक्शन और रेलवे स्टेशन से डाकबंगला चौराहे की ओर आने वाले सभी प्रकार के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। पुलिस प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की थी कि वे जाम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का चयन करें।
आगे क्या हो सकता है?
तेजस्वी यादव की हिरासत के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने के आसार हैं। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की पूरी तैयारी में है। देखना यह होगा कि क्या सरकार छात्रों की मांगों पर कोई नरमी दिखाती है या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप लेता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. राजद ने पटना में लोकभवन मार्च क्यों निकाला था?
यह मार्च मुख्य रूप से छात्रों की समस्याओं, बेरोजगारी, BPSC TRE-4 परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग के विरोध और सिवान में हुई हिंसक घटनाओं के खिलाफ आयोजित किया गया था।
2. क्या तेजस्वी यादव को गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बैरिकेडिंग तोड़ने के आरोप में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को हिरासत में लिया है।
3. इस प्रदर्शन में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?
इस मार्च में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के अलावा राजद सांसद मीसा भारती और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता व हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए थे।