द्वितीय विश्व युद्ध की आग भले ही दशकों पहले शांत हो गई हो, लेकिन उसकी अधूरी छोड़ी गई विमर्श की लपटें आज भी दुनिया के कई हिस्सों में सुलग रही हैं। ताजा मामला रूस और जापान के बीच का है, जहां प्रशांत महासागर में स्थित एक भूभाग यानी कुरील आईलैंड (Kuril Islands) को लेकर कूटनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का इस विवादित क्षेत्र का दौरा करना ऐसा चिंगारी साबित हुआ है, जिससे टोक्यो से लेकर मॉस्को तक राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
क्यों सुलग रहा है कुरील आईलैंड का मुद्दा?
यह पूरा विवाद द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दिनों से जुड़ा हुआ है। साल 1945 के फरवरी महीने में ऐतिहासिक याल्टा समझौता हुआ था। इसके तहत अमेरिका, ब्रिटेन और सोवियत संघ के बीच सहमति बनी थी कि यदि सोवियत संघ जापान के खिलाफ युद्ध में उतरता है, तो उसे कुरील द्वीप समूह का नियंत्रण मिल जाएगा।
अगस्त 1945 में सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया। युद्ध के बाद और जापान के आत्मसमर्पण के बाद भी सोवियत सेना ने दक्षिणी चार द्वीपों पर अपना कब्जा जमाए रखा और वहां रह रहे लगभग 17,000 जापानी नागरिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। तब से लेकर आज तक इन द्वीपों पर रूस का पूर्ण नियंत्रण है, लेकिन जापान लगातार इन्हें अपना 'उत्तरी क्षेत्र' बताकर इन पर अपना दावा ठोकता आया है।
पुतिन का इतुरुप दौरा और जापान की तीखी प्रतिक्रिया
हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस द्वीप समूह के सबसे दक्षिण में स्थित चार द्वीपों में से एक 'इतुरुप' (जिसे जापान 'एतोरोफु' कहता है) का दौरा किया। रूसी राष्ट्रपति का इन द्वीपों पर यह पहला आधिकारिक दौरा था। इस यात्रा ने जापान की सियासत में भूचाल ला दिया है।
जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने पुतिन के इस कदम को जापानी भावनाओं पर सीधा आघात करार दिया है। जापानी पीएम ने दो टूक कहा कि:
"पुतिन का यह दौरा उत्तरी क्षेत्रों पर जापान के पारंपरिक रुख के बिल्कुल खिलाफ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। यूक्रेन संकट को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं, ऐसे में यह दौरा एक और बड़ा झटका है। मॉस्को को इसके गंभीर नतीजों का अहसास होना चाहिए।"
रूस का कड़ा रुख: 'हमारी संप्रभुता अटूट है'
जापान की तरफ से तीखी आलोचना और विरोध सामने आने के बाद रूस भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखा। मॉस्को ने तुरंत कड़ा कदम उठाते हुए जापानी राजदूत अकीरा मुतो को तलब कर लिया।
रूसी उप-विदेश मंत्री मिखाइल गलुज़िन ने जापानी राजदूत के साथ बैठक में टोक्यो के बयानों को 'रूस-विरोधी' करार देते हुए औपचारिक रूप से कड़ा ऐतराज जताया। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया—
- दक्षिणी कुरील द्वीपों पर रूस की संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र पूरी तरह से अकाट्य और अटूट है।
- ये इलाके द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के तहत वैध रूप से रूस को मिले हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मान्यता प्राप्त है।
- जापानी पक्ष द्वारा इस ऐतिहासिक सच्चाई पर सवाल उठाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अस्वीकार्य है।
इतना ही नहीं, रूस ने जापान को चेतावनी दी है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का आंख मूंदकर समर्थन करने और यूक्रेन के पक्ष में खड़े होने के चलते रूस के पास हर उचित जवाबी कदम उठाने का पूरा अधिकार है।
शांति समझौते की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका
हैरानी की बात यह है कि इस कड़े भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण द्वितीय विश्व युद्ध के इतने साल बाद भी रूस और जापान के बीच आज तक कोई आधिकारिक शांति समझौता (Peace Treaty) साइन नहीं हो पाया है। दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने की कई दशक लंबी कूटनीतिक कोशिशें अब तक बेनतीजा साबित हुई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में रूस ने कुरील द्वीपों पर अपनी सैन्य उपस्थिति और सैन्य बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत किया है, जो इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ ढीली न करने के उसके इरादों को साफ जाहिर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: कुरील आईलैंड्स पर कौन-कौन से देश दावा करते हैं?
Ans: कुरील द्वीप समूह पर वर्तमान में रूस का प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण है, लेकिन जापान भी इन द्वीपों को अपना हिस्सा मानता है और इन्हें अपना 'उत्तरी क्षेत्र' (Northern Territories) कहता है।
Q2: जापान इन द्वीपों को क्या कहकर पुकारता है?
Ans: जापान इन विवादित द्वीपों को अपने उत्तरी क्षेत्र के रूप में देखता है और विशेष तौर पर इतुरुप द्वीप को 'एतोरोफु' (Etorofu) नाम से संबोधित करता है।
Q3: रूस और जापान के बीच शांति समझौता क्यों नहीं हो पाया है?
Ans: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से ही कुरील द्वीप समूह की ओनरशिप को लेकर दोनों देशों के बीच गहरा भू-राजनीतिक विवाद चल रहा है, जिसके कारण आज तक दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक शांति संधि नहीं हो सकी है।