डॉक्टर से आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इलाज करवा रहा है, वह वाकई में एक योग्य चिकित्सक है भी या नहीं? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि इन दिनों झोलाछाप और फर्जी डॉक्टरों ने आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करना शुरू कर दिया है। इसी गंभीर खतरे को भांपते हुए महाराष्ट्र के नागपुर शहर में प्रशासन ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। नागपुर महानगर पालिका (NMC) और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से शहर में अवैध क्लीनिकों और बोगस डॉक्टरों के खिलाफ एक विशेष और ताबड़तोड़ अभियान का आगाज कर दिया है।
अधिकारियों की संयुक्त टीम ने संभाला मोर्चा
नागपुर शहर के नागरिकों को पूरी तरह से सुरक्षित और अधिकृत मेडिकल सेवाएं मिल सकें, इसके लिए मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। महापौर के सख्त निर्देशों और जिलाधिकारी कार्यालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर एक उच्च-स्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है।
इस संयुक्त टीम में प्रशासन के विभिन्न विभागों के नुमाइंदों को शामिल किया गया है ताकि किसी भी फर्जी डॉक्टर को कानूनी पेंच का फायदा उठाकर बचने का मौका न मिल सके। इस टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:
- जोनल चिकित्सा अधिकारी (Zone Medical Officers)
- मलेरिया निरीक्षक और औषध निर्माण अधिकारी (फार्मासिस्ट)
- स्थानीय पुलिस निरीक्षक और पुलिस बल
- अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग के प्रतिनिधि
कौन-कौन आएगा इस कार्रवाई के रडार पर?
प्रशासन की ओर से यह बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि कानून के दायरे से बाहर जाकर मरीजों की जान से खेलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी आदेश के मुताबिक, कार्रवाई के दायरे में मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग आएंगे:
- ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसके पास सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) की कोई वैध डिग्री या डिप्लोमा नहीं है।
- जो व्यक्ति किसी भी वैधानिक मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत (Registered) नहीं है, लेकिन फिर भी धड़ल्ले से क्लीनिक चला रहा है।
- जो लोग एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी या दंत चिकित्सा की तयशुदा और मान्यता प्राप्त प्रणालियों से हटकर अवैज्ञानिक तरीकों से इलाज कर रहे हैं।
प्रशासन ने याद दिलाया है कि महाराष्ट्र राज्य में वैध रूप से प्रैक्टिस करने के लिए महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल, महाराष्ट्र होम्योपैथी काउंसिल, महाराष्ट्र चिकित्सा परिषद (आयुर्वेद और यूनानी) या महाराष्ट्र डेंटल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है। इसके बिना प्रैक्टिस करना सीधा-सीधा कानूनन जुर्म है।
जोन स्तर पर होगी सख्त जांच, नागरिकों से भी की गई बड़ी अपील
अतिरिक्त आयुक्त के मार्गदर्शन में बनाए गए ये विशेष दस्ते अब नागपुर के हर एक जोन में जाकर संदिग्ध क्लीनिकों और दवाखानों की सघन तलाशी ले रहे हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई इलाकों में ऐसे अवैध क्लीनिकों की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई तेज कर दी गई है।
"जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देशों के तहत जोन स्तर पर संदिग्ध बोगस डॉक्टरों की खोजबीन शुरू कर दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम नागपुर के आम नागरिकों से भी अपील करते हैं कि वे ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं।" - मनपा प्रशासन
फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ ऐसे दर्ज कराएं शिकायत
प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए आम जनता का सहयोग मांगा है। यदि आपके आसपास या आपके मोहल्ले में कोई संदिग्ध व्यक्ति बिना वैध डिग्री के इलाज कर रहा है, तो आप चुप न बैठें बल्कि तुरंत इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकार ने विशेष हेल्पलाइन और डिजिटल माध्यम जारी किए हैं:
- टोल-फ्री नंबर: राज्य स्तरीय शिकायत निवारण कक्ष के टोल-फ्री नंबर 104 पर कॉल कर सकते हैं।
- व्हाट्सएप चैटबॉट: जिलाधिकारी कार्यालय के आधिकारिक चैटबॉट नंबर 8669494944 पर मैसेज करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इसके अलावा, लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए इन सभी हेल्पलाइन नंबर्स की जानकारी नागपुर मनपा के तमाम शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHC) के परिसरों में भी बड़े-बड़े बोर्ड्स पर प्रदर्शित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. बोगस या फर्जी डॉक्टर किसे माना जाता है?
Ans: ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसके पास सरकार से मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री या डिप्लोमा नहीं है और जो किसी भी स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड नहीं है, वह अवैध या बोगस डॉक्टर की श्रेणी में आता है।
Q2. अगर हमारे इलाके में कोई फर्जी क्लीनिक चल रहा है, तो हम कहां शिकायत करें?
Ans: आप स्वास्थ्य विभाग के टोल-फ्री नंबर 104 पर कॉल कर सकते हैं या नागपुर जिलाधिकारी कार्यालय के आधिकारिक चैटबॉट नंबर 8669494944 पर अपनी शिकायत भेज सकते हैं।
Q3. इस संयुक्त छापेमारी अभियान में कौन-कौन से विभाग शामिल हैं?
Ans: इस अभियान में नागपुर महानगर पालिका (NMC) के स्वास्थ्य अधिकारी, स्थानीय पुलिस बल, एफडीए (FDA) और जोनल चिकित्सा अधिकारी मिलकर कार्रवाई कर रहे हैं।