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एलन मस्क का बड़ा कमाल: अंतरिक्ष में पहुंचे 11,000 स्टारलिंक सैटेलाइट, दुनिया हैरान

एलन मस्क का बड़ा कमाल: अंतरिक्ष में पहुंचे 11,000 स्टारलिंक सैटेलाइट, दुनिया हैरान

अंतरिक्ष की दुनिया में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने एक और ऐसा मील का पत्थर हासिल कर लिया है, जिससे बाकी अंतरिक्ष एजेंसियां और कंपनियां काफी पीछे छूट गई हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बड़ी घोषणा करते हुए स्पेसएक्स के मुखिया एलन मस्क ने बताया कि कंपनी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'स्टारलिंक' (Starlink) के तहत अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित सक्रिय सैटेलाइट्स की संख्या अब 11,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है।

वर्तमान समय में पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में इतनी बड़ी संख्या में सैटेलाइट्स का संचालन करने वाली दुनिया में कोई दूसरी कंपनी या अंतरिक्ष एजेंसी आसपास भी नहीं है। यह उपलब्धि अंतरिक्ष संचार और सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।

ग्लोबल स्पेस मार्केट में स्टारलिंक का दबदबा

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पेसएक्स का यह नेटवर्क पूरी दुनिया की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है। 'कीपट्रैक' (KeepTrack) की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 तक पृथ्वी की निचली कक्षा में पांच सबसे बड़े अंतरिक्ष यान समूहों की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:

  • स्टारलिंक (SpaceX): 10,783 सैटेलाइट्स
  • वनवेब (OneWeb): 654 सैटेलाइट्स
  • अमेजन (Amazon): 394 सैटेलाइट्स
  • कियानफान (Qianfan): 238 सैटेलाइट्स
  • कुवोवाक (Quovaq): 186 सैटेलाइट्स

इन आंकड़ों से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि पृथ्वी की कक्षा में मौजूद कुल 19,447 पेलोड्स में से आधे से अधिक अकेले स्टारलिंक के पास हैं। दिलचस्प बात यह है कि स्टारलिंक के पास अगले 10 सबसे बड़े समूहों के कुल सैटेलाइट्स की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक सैटेलाइट्स मौजूद हैं।

लांचिंग की रफ्तार और डी-ऑर्बिटिंग की प्रक्रिया

मई 2019 में अपनी पहली सफल लॉन्चिंग के बाद से, स्पेसएक्स ने अब तक कुल 12,444 स्टारलिंक सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे हैं। हालांकि, इनमें से करीब 1,660 सैटेलाइट्स को उनकी मियाद पूरी होने या अन्य तकनीकी कारणों से सुरक्षित रूप से कक्षा से बाहर (De-orbit) कर लिया गया है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही पूरी तरह जलकर राख हो गए।

यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि जितने स्टारलिंक सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष से हटाया जा चुका है, वह संख्या दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सैटेलाइट ऑपरेटर 'वनवेब' द्वारा अब तक कुल लॉन्च किए गए सैटेलाइट्स से भी ज्यादा है। यह स्पेसएक्स की तकनीकी क्षमता और स्पेस ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर ढंग से संभालने की उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है।

हर हफ्ते हो रहे हैं नए मिशन

स्पेसएक्स यहीं रुकने वाला नहीं है। कंपनी अपने इस विशालकाय नेटवर्क का दायरा लगातार बढ़ा रही है। मौजूदा समय में हर हफ्ते औसतन दो से तीन स्टारलिंक मिशन अंतरिक्ष के लिए लॉन्च किए जा रहे हैं। कंपनी का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में भी हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा मुहैया कराना है, जहां पारंपरिक फाइबर केबल या टावर लगाना असंभव है।1.2 करोड़ से अधिक हुए ग्राहक

सिर्फ तकनीकी विस्तार ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक मोर्चे पर भी स्टारलिंक ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में स्टारलिंक के इंटरनेट ग्राहकों का बेस (Subscriber Base) अब 1.2 करोड़ (12 मिलियन) के आंकड़े को पार कर चुका है। सुदूर इलाकों के आम नागरिकों से लेकर समुद्री जहाजों, एयरलाइंस और आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक में इस सैटेलाइट इंटरनेट की मांग आसमान छू रही है।

भविष्य की चुनौतियां और स्पेस डिब्रिस (अंतरिक्ष कचरा)

भले ही स्टारलिंक की यह सफलता हर किसी को हैरान कर रही हो, लेकिन अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का एक वर्ग इसे लेकर चिंता भी जता रहा है। पृथ्वी की कक्षा में इतने सारे सैटेलाइट्स होने से 'स्पेस डिब्रिस' (अंतरिक्ष कचरा) और खगोल विज्ञान (Astronomy) में बाधा उत्पन्न होने का खतरा लगातार बना रहता है। हालांकि, स्पेसएक्स का दावा है कि उनके सैटेलाइट्स रीसाइकिल होने योग्य और सुरक्षित हैं, जो जीवनकाल खत्म होने पर स्वतः नष्ट हो जाते हैं।

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गुंजा पांडेय

गुंजा पांडेय

Chief Sub Editor (Sports & Science)

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

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