उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से गुजरने वाले एक्सप्रेसवे पर हुई एक बड़ी कार्रवाई इन दिनों राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पुलिस ने एक विटारा ब्रेजा कार से करोड़ों रुपये का सोना बरामद किया है, लेकिन इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की मंशा और कार्रवाई पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए।
एक्सप्रेसवे पर वाहन चेकिंग के दौरान हुआ बड़ा खुलासा
घटना की शुरुआत तब हुई जब पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें एक्सप्रेसवे पर नियमित वाहनों की चेकिंग कर रही थीं। इसी दौरान संदिग्ध हालत में आ रही एक ब्रेजा कार को रुकने का इशारा किया गया। कार की तलाशी ली गई तो अधिकारियों के होश उड़ गए। गाड़ी के अंदर से भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि यह सोना अवैध तरीके से तस्करी के जरिए लाया जा रहा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सोने की यह बड़ी खेप नेपाल के रास्ते भारतीय सीमा में लाई गई थी और इसे आगे किसी बड़े ठिकाने पर पहुंचाया जाना था। सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।
अखिलेश यादव का बड़ा दावा: '26 किलो पकड़ा, दिखाया सिर्फ 10 किलो'
यह मामला सिर्फ सोने की तस्करी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अखिलेश यादव का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने मिलकर आंकड़ों में हेराफेरी की है। उनका दावा है कि असलियत में गाड़ी से 26 किलो सोना बरामद किया गया था, लेकिन पुलिस ने कागजों और मीडिया में केवल 10 किलो सोना ही दिखाया है। बाकी के सोने का क्या हुआ? इस सवाल ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है।
"उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था का यह हाल है कि अब तस्करों और पुलिस की मिलीभगत से करोड़ों के माल का गोलमाल किया जा रहा है। कन्नौज में पकड़े गए सोने की वास्तविक मात्रा कुछ और है और दिखाया कुछ और जा रहा है। जनता सब देख रही है।" - अखिलेश यादव (संभावित बयान का सार)
तस्करी का नेपाल कनेक्शन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता
खुफिया एजेंसियों और पुलिस के मुताबिक, नेपाल सीमा भारत के कई राज्यों से सटी हुई है, जिसका फायदा उठाकर तस्कर अक्सर इस रूट का इस्तेमाल करते हैं। सोना तस्करी के पुराने मामलों पर नजर डालें तो कैरियर्स छोटे रास्तों और एक्सप्रेसवे का उपयोग करके पुलिस की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश करते हैं।
कन्नौज में पकड़े गए इस मामले ने एक बार फिर से इस बात को उजागर कर दिया है कि देश के भीतर अवैध सोने का सिंडिकेट किस तरह से सक्रिय है। त्योहारी सीजन या बाजार में सोने की मांग बढ़ने पर ऐसे मामलों में अचानक तेजी देखने को मिलती है।
पुलिस प्रशासन का पक्ष और आगे की कार्रवाई
अखिलेश यादव के तीखे हमलों के बाद कन्नौज पुलिस और प्रशासन की तरफ से सफाई सामने आई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमों के दायरे में रहकर की गई है। वजन तौलने के बाद ही जब्ती की सूची बनाई गई है और इसमें किसी भी तरह की लीपापोती नहीं की गई है।
पुलिस का यह भी कहना है कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस तस्करी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। आयकर विभाग (Income Tax Department) और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) को भी इस मामले की सूचना दे दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सिंडिकेट के तार देश के किन-किन हिस्सों से जुड़े हैं।
1. कन्नौज एक्सप्रेसवे पर कार से कितना सोना पकड़ा गया है?
पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई में लगभग 10 किलो सोना बरामद किया गया है, जिसकी कीमत करोड़ों में है। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव का दावा है कि जब्ती 26 किलो सोने की थी।
2. सोना कहां से लाया जा रहा था?
प्राथमिक जांच और खुफिया इनपुट्स के आधार पर यह सोना नेपाल के रास्ते तस्करी कर भारत में लाया जा रहा था।
3. अखिलेश यादव ने क्या आरोप लगाए हैं?
अखिलेश यादव ने पुलिस की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बरामद सोने की वास्तविक मात्रा छुपाई जा रही है और कागजों में कम मात्रा दर्शाई गई है।
