स्मार्टफोन आज के समय में हमारी जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा बन चुका है, जिसके बिना एक पल भी बिताना मुश्किल लगता है। सुबह की अलार्म से लेकर रात की नींद तक, बैंकिंग से लेकर मनोरंजन तक, सब कुछ इसी छोटी सी स्क्रीन पर सिमटा है। ऐसे में जैसे ही फोन थोड़ा धीमा होता है या बैटरी जल्दी उतरने लगती है, हमारे मन में फौरन नया फोन खरीदने का विचार आ जाता है। लेकिन क्या हर बार नया फोन खरीदना समझदारी है?
अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि अपने पुराने स्मार्टफोन को कब अलविदा कहें और नया डिवाइस कब घर लाएं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए ही है। यहां हम आपको बता रहे हैं उस तकनीकी गणित के बारे में, जो आपको यह तय करने में मदद करेगा कि आपका फोन वाकई रिटायरमेंट मांग रहा है या फिर उसे अभी और चलाया जा सकता है।
क्या सिर्फ बैटरी खराब होने पर बदल देना चाहिए पूरा फोन?
यह सबसे आम सवाल है जो हर स्मार्टफोन यूजर के दिमाग में आता है। लिथियम-आयन बैटरी की एक निश्चित उम्र होती है। वक्त के साथ हर फोन की बैटरी क्षमता कम होती ही है। अगर आपका फोन सुबह चार्ज करने पर शाम तक ही जवाब दे रहा है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको सीधे मार्केट जाकर नया फोन खरीद लेना चाहिए।
एक प्रीमियम या अच्छी क्वालिटी का स्मार्टफोन अंदरूनी रूप से कई सालों तक बेहतरीन परफॉर्मेंस दे सकता है। ऐसे में यदि समस्या केवल बैटरी की है, तो आप पूरे फोन पर हजारों रुपये खर्च करने के बजाय सिर्फ उसकी बैटरी बदलवा सकते हैं। अधिकृत सर्विस सेंटर से ऑरिजिनल बैटरी डलवाने के बाद आपका पुराना फोन लगभग नए जैसी रफ्तार पकड़ लेगा। यही नियम टूटी हुई स्क्रीन या चार्जिंग पोर्ट जैसी छोटी-मोटी दिक्कतों पर भी लागू होता है।
बार-बार गिरने से होने वाला अंदरूनी नुकसान
कई बार हमारा फोन हाथ से फिसलकर जमीन पर गिर जाता है। अगर ऊपर से कांच या बॉडी बिल्कुल सुरक्षित दिखती है, तो हम आश्वस्त हो जाते हैं कि फोन को कुछ नहीं हुआ। लेकिन अंदरूनी तौर पर सर्किट्स या शोल्डर जॉइंट्स पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि, आधुनिक तकनीक और बेहतर रिपेयरिंग सेंटर्स की मदद से इन अंदरूनी हिस्सों को भी ठीक किया जा सकता है। इसलिए बिना सोचे-समझे फोन को कबाड़ में देने के बजाय किसी अच्छे मैकेनिक से उसकी हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं।
असली खतरा: सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स का बंद होना
हार्डवेयर या बॉडी खराब होने से ज्यादा खतरनाक स्थिति तब बनती है जब फोन का सॉफ्टवेयर पुराना हो जाए। मोबाइल निर्माता कंपनियां हर मॉडल के लिए एक तय समय (आम तौर पर 3 से 5 साल) तक ही ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) और सिक्योरिटी पैच अपडेट जारी करती हैं।
जब आपके फोन को कंपनी की तरफ से सिक्योरिटी अपडेट मिलना बंद हो जाते हैं, तो वह साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकता है। आज के दौर में हमारे फोन में यूपीआई ऐप्स, नेट बैंकिंग, आधार कार्ड, पर्सनल तस्वीरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स होते हैं। अगर आपका फोन सिक्योर नहीं है, तो एक छोटा सा मालवेयर या बग आपके बैंक खाते को खाली कर सकता है। इसलिए, अगर आपका फोन अब लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट्स रिसीव नहीं कर रहा है, तो सुरक्षा के लिहाज से उसे बदलना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प बचता है।
कब मान लेना चाहिए कि अब नया फोन खरीदने का वक्त आ गया है?
फोन बदलने की कोई तय एक्सपायरी डेट नहीं होती, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां होती हैं जहां नया फोन लेना मजबूरी बन जाता है:
- स्पेयर पार्ट्स की अनुपलब्धता: जब फोन बहुत पुराना हो जाता है, तो कंपनियां उसके ओरिजिनल स्पेयर पार्ट्स बनाना बंद कर देती हैं। ऐसे में रिपेयरिंग या तो नामुमकिन हो जाती है या लोकल पार्ट्स के भरोसे फोन चलाना पड़ता है जो खतरनाक हो सकता है।
- मदरबोर्ड का डेड होना: यदि फोन का मुख्य प्रोसेसर या मदरबोर्ड खराब हो जाए, तो उसकी मरम्मत पर आने वाला खर्च नए फोन की कीमत के बराबर हो जाता है।
- डेली यूसेज में भारी लैग: अगर फोन लगातार हैंग हो रहा है, बेसिक ऐप्स भी नहीं खुल रहे हैं और रिसेट करने के बाद भी कोई सुधार नहीं है, तो अपग्रेड करना ही बेहतर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या मुझे हर साल आने वाला नया मॉडल खरीदना चाहिए?
बिल्कुल नहीं। अगर आपके पास मौजूद फोन आपकी सभी जरूरतों को आसानी से पूरा कर रहा है और उसे लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट्स मिल रहे हैं, तो सिर्फ दिखावे या नए फीचर्स के चक्कर में हर साल फोन बदलना पैसों की बर्बादी है।
2. बैटरी बदलने में कितना खर्च आता है?
बैटरी बदलने का खर्च आपके फोन के ब्रांड और मॉडल पर निर्भर करता है। सामान्य एंड्रॉयड या आईफोन की बैटरी बदलने का खर्च नए फोन की कीमत का 10वां हिस्सा भी नहीं होता है।
3. पुराना फोन बेचने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
नया फोन लेने के बाद जब आप पुराना फोन बेचें या एक्सचेंज करें, तो उससे पहले अपना सारा डाटा पूरी तरह से वाइप (Factory Reset) कर लें और अपने सभी बैंक खातों व ईमेल से लॉग आउट करना बिल्कुल न भूलें।