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अमित मालवीय की बीजेपी आईटी सेल से विदाई की इनसाइड स्टोरी, संघ की नाराजगी थी वजह?

अमित मालवीय की बीजेपी आईटी सेल से विदाई की इनसाइड स्टोरी, संघ की नाराजगी थी वजह?

राजनीति के गलियारों में इन दिनों एक ऐसी हलचल मची है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है, और इस फेरबदल में सबसे बड़ा झटका किसी को लगा है, तो वह हैं पार्टी के लंबे समय तक 'डिजिटल योद्धा' रहे अमित मालवीय। जी हां, पिछले करीब 11 सालों से बीजेपी के आईटी सेल की कमान संभाल रहे अमित मालवीय को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। उनकी जगह अब यह कमान दीपक म्हास्के को सौंपी गई है।

लेकिन, सवाल यह है कि आखिर एक दशक से ज्यादा समय तक पार्टी के डिजिटल कैंपेन को धार देने वाले मालवीय रातों-रात साइडलाइन कैसे हो गए? क्या यह महज एक सामान्य संगठनात्मक बदलाव है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक पटकथा लिखी गई है? आइए टटोलते हैं इस पूरी उठापटक की इनसाइड स्टोरी।

करीब एक दशक का दौर और अचानक बदलाव

साल 2014 के राजनीतिक बदलाव के बाद से ही अमित मालवीय का नाम बीजेपी के सोशल मीडिया और डिजिटल स्ट्रैटेजी का पर्याय बन चुका था। विपक्ष पर तीखे हमले करना, पार्टी के रुख का सोशल मीडिया पर मजबूती से बचाव करना और चुनावी रणनीतियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी इस्तेमाल करना—इन सब में मालवीय की भूमिका बेहद अहम मानी जाती थी।

ऐसे में, अचानक उनकी विदाई होना और उनकी जगह दीपक म्हास्के को आगे लाना राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी हैरान करने वाला रहा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रही नाराजगी और रणनीतिक बदलाव की जमीन तैयार हो रही थी।

क्या संघ की नाराजगी पड़ी भारी?

सूत्रों के हवाले से जो खबरें छनकर बाहर आ रही हैं, उनके मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की नाराजगी को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। पार्टी के भीतर और संघ के कुछ वरिष्ठ हलकों में लंबे समय से यह चर्चा थी कि सोशल मीडिया पर संवाद की शैली और पार्टी की वैचारिक प्राथमिकताओं को लेकर कुछ असहजता थी।

  • कम्युनिकेशन स्टाइल पर सवाल: जानकारों का मानना है कि संघ परिवार हमेशा से वैचारिक अनुशासन और संयमित भाषा पर जोर देता है। पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर जिस आक्रामक शैली का बोलबाला रहा, उसे लेकर संघ के भीतर से दबी जुबान में आपत्ति जताई जा रही थी।
  • जमीन से जुड़ाव और डिजिटल अप्रोच: संघ का मानना है कि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म और वर्चुअल दुनिया की रैलियों से चुनावी जमीन पर स्थायी प्रभाव नहीं छोड़ा जा सकता। जमीनी स्तर के कैडर के साथ बेहतर तालमेल और समन्वय समय की मांग है।
  • नई लीडरशिप की तलाश: पार्टी और संघ दोनों का मानना था कि अब आईटी सेल को एक नए दृष्टिकोण और ज्यादा समावेशी कार्यशैली की जरूरत है, जो दीपक म्हास्के के रूप में पूरी होती दिखाई दे रही है।

कौन हैं दीपक म्हास्के, जिन्हें मिली है कमान?

अमित मालवीय की जगह लेने वाले दीपक म्हास्के को पार्टी ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। म्हास्के की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हैं। उन्हें एक शांत, संगठनात्मक रूप से अनुशासित और बिना किसी शोर-शराबे के चुपचाप अपना काम करने वाले नेता के रूप में जाना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी अब आने वाले विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए अपनी छवि में कुछ नरमी और संवाद के स्तर पर परिपक्वता लाना चाहती है। दीपक म्हास्के की नियुक्ति इसी रणनीति का एक हिस्सा हो सकती है।

पार्टी के भीतर और बाहर क्या हैं मायने?

राजनीतिक दल जब भी अपनी टीम में इस स्तर का बदलाव करते हैं, तो उसके संदेश दूर तक जाते हैं। अमित मालवीय को हटाए जाने को विपक्षी दल भी अपने नजरिए से देख रहे हैं। हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह संगठन की एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें समय-समय पर चेहरों को बदला जाता है ताकि नए विचारों को जगह मिल सके।

लेकिन राजनीति को करीब से समझने वाले जानते हैं कि 11 साल का कार्यकाल बहुत लंबा होता है और इतने महत्वपूर्ण पद से विदाई बिना किसी बड़े सियासी समीकरण के पूरी नहीं होती। संघ और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठकों में यह स्पष्ट हो चुका था कि अब डिजिटल विंग को ऑपरेट करने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी है।

निष्कर्ष

अमित मालवीय का आईटी हेड के पद से हटना महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि बीजेपी के अंदर चल रहे वैचारिक और रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दीपक म्हास्के इस जिम्मेदारी को किस दिशा में ले जाते हैं और क्या पार्टी के डिजिटल कैंपेन के तेवर में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: अमित मालवीय को किस पद से हटाया गया है?

अमित मालवीय को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय आईटी सेल के हेड (प्रभारी) के पद से मुक्त किया गया है। वे पिछले करीब 11 वर्षों से इस जिम्मेदारी को संभाल रहे थे।

Q2: उनकी जगह अब किसे नया आईटी हेड बनाया गया है?

अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को बीजेपी का नया आईटी हेड नियुक्त किया गया है।

Q3: इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण क्या माना जा रहा है?

राजनीतिक विश्लेषकों और सूत्रों के अनुसार, सोशल मीडिया पर संवाद की शैली को लेकर संघ (RSS) की कुछ आपत्तियों और पार्टी की नई रणनीतिक जरूरतों को इस बदलाव का मुख्य कारण माना जा रहा है।

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रिपोर्टर: Kavya Tripathi

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