मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच यमन के युद्धग्रस्त इलाके से एक बेहद खौफनाक और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने देश की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकारी सेना के ठिकानों पर एक जोरदार और अचानक हमला बोल दिया है। इस भीषण सैन्य मुठभेड़ में यमन के कम से कम 38 सैनिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों अन्य जवान गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।
अचानक हुए हमले से दहल उठा सैन्य मोर्चा
प्राप्त सैन्य जानकारियों के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने यमन के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अग्रिम मोर्चों को निशाना बनाकर यह हमला योजनाबद्ध तरीके से किया। हमले के दौरान भारी तोपखाने, मोर्टार और आधुनिक हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया। सरकारी बलों के संभलने से पहले ही विद्रोही भारी गोलाबारी करने लगे, जिसके कारण सेना को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
"हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया यह हमला हाल के महीनों में यमन की सरकारी सेना पर हुआ सबसे बड़ा और प्राणघातक हमला माना जा रहा है, जिससे इलाके में पूरी तरह अफरा-तफरी का माहौल है।"
यमन में क्यों गहराया है यह संकट?
यमन में साल 2014 से ही भीषण गृहयुद्ध जारी है। एक तरफ जहां यमन की आधिकारिक सरकार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सऊदी अरब नीत सैन्य गठबंधन का समर्थन हासिल है, वहीं दूसरी तरफ हूती विद्रोही राजधानी साना सहित देश के कई बड़े हिस्सों पर काबिज हैं। पिछले कुछ समय से लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाने के बाद अब हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर यमन के जमीनी मोर्चों पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।
इस हमले के 3 बड़े और गंभीर परिणाम:
- शांति प्रयासों को बड़ा झटका: संयुक्त राष्ट्र (UN) और क्षेत्रीय मध्यस्थों द्वारा यमन में स्थायी युद्धविराम के लिए किए जा रहे प्रयासों पर इस हमले से पानी फिर गया है।
- बड़ा मानवीय और सैन्य नुकसान: एक ही हमले में 38 सैनिकों का मारा जाना यमन सरकार की सेना के लिए बहुत बड़ा झटका है।
- पलटवार की आशंका: यमन की सरकारी सेना और उसके सहयोगी संगठन अब हूती ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंताएं
इस ताजा हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में एक बार फिर से पूर्णकालिक युद्ध छिड़ने की आशंका तेज हो गई है। वैश्विक कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यमन की सरकारी सेना और उसके सहयोगी देश हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू करते हैं, तो लाल सागर और उसके आसपास के समुद्री मार्गों में सुरक्षा स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। फिलहाल, सुरक्षा बलों ने पूरे प्रभावित इलाके की घेराबंदी कर दी है और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।