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जेलेंस्की के खिलाफ जंग! यूक्रेन के पूर्व मंत्री ने खोला मोर्चा, अब अमेरिका जाने की तैयारी

जेलेंस्की के खिलाफ जंग! यूक्रेन के पूर्व मंत्री ने खोला मोर्चा, अब अमेरिका जाने की तैयारी

रूस और यूक्रेन के बीच जारी भीषण जंग के बीच अब कीव की राजनीति में भी बारूदी सुगबुगाहट तेज हो गई है। मोर्चे पर दुश्मन सेना से लोहा ले रहे यूक्रेन के लिए अब अंदरूनी मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने देश के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। इस राजनीतिक उठापटक ने न केवल यूक्रेनी गलियारों में बल्कि पश्चिमी देशों की राजधानियों में भी हलचल पैदा कर दी है।

जेलेंस्की सरकार के सामने नई चुनौती

युद्ध के इस नाजुक दौर में जहां पूरा देश एक जुट होकर रूसी आक्रमण का सामना करने का दावा कर रहा है, वहीं मिखाइलो फेडोरोव का यह कदम एक बड़े राजनीतिक भूकंप की तरह है। फेडोरोव ने खुलकर देश में युद्धकालीन चुनाव (Wartime Elections) कराने की मांग कर दी है। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रियाओं को युद्ध के साए में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन की सेना को मोर्चे पर भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के भीतर इस तरह की दरार मॉमको (रूस) के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है।

अमेरिका जाने की तैयारी और कूटनीतिक मायने

राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि मिखाइलो फेडोरोव जल्द ही अमेरिका का दौरा करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका को यूक्रेन का सबसे बड़ा सैन्य और आर्थिक मददगार माना जाता है। ऐसे में फेडोरोव का अमेरिकी दौरा कई बड़े राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि फेडोरोव वाशिंगटन में अमेरिकी नीति निर्माताओं और राजनीतिक दिग्गजों से मुलाकात कर सकते हैं। इस यात्रा के दौरान वह यूक्रेन के मौजूदा राजनीतिक हालात और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कर सकते हैं। क्या यह अमेरिका का समर्थन हासिल करने का कोई नया प्रयास है या फिर जेलेंस्की के विकल्प के रूप में खुद को पेश करने की कूटनीतिक चाल? यह आने वाला समय ही बताएगा।

युद्धकालीन चुनाव की मांग क्यों बनी विवाद की जड़?

  • संवैधानिक संकट: यूक्रेन के संविधान के अनुसार, युद्धकाल के दौरान देश में आम चुनाव कराना प्रतिबंधित है।
  • लोकतांत्रिक वैधता: आलोचकों का तर्क है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की का आधिकारिक कार्यकाल पूरा हो चुका है, और युद्ध के नाम पर इसे अनिश्चितकाल तक नहीं बढ़ाया जा सकता।
  • पश्चिमी देशों का दबाव: अमेरिका और यूरोपीय संघ लगातार यूक्रेन में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत रखने और समय पर चुनाव कराने के संकेत देते रहे हैं।

युद्ध के मैदान से लेकर सियासत तक उथल-पुथल

जब एक तरफ यूक्रेन के सैनिक बख्तरबंद गाड़ियों और खाइयों में कड़ाके की ठंड और रूसी हमलों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजधानी कीव की आलीशान इमारतों में सत्ता की कुर्सी के लिए खींचतान शुरू हो गई है। मिखाइलो फेडोरोव का यह बागी तेवर यूक्रेनी समाज और राजनीतिक खेमे को विभाजित कर सकता है।

यूक्रेनी नागरिकों के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या ऐसे समय में जब देश का अस्तित्व दांव पर है, राजनीतिक लड़ाइयों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए? आम जनता का एक बड़ा वर्ग इस तरह की आंतरिक कलह से बेहद चिंतित है। उनका मानना है कि आपसी फूट का सीधा फायदा रूस को मिलेगा।

आगे क्या हो सकता है?

आने वाले सप्ताह यूक्रेन के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। फेडोरोव की अमेरिका यात्रा और वहां होने वाली बैठकों से यह साफ हो जाएगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस अंदरूनी कलह को किस नजरिए से देखता है। क्या बाइडेन प्रशासन या पश्चिमी देश जेलेंस्की के अलावा किसी अन्य नेतृत्व पर दांव लगाने की सोच रहे हैं? यह सवाल अब वैश्विक कूटनीति के केंद्र में आ गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. मिखाइलो फेडोरोव कौन हैं?

मिखाइलो फेडोरोव यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री और हाई-प्रोफाइल राजनेता हैं, जिन्होंने हाल ही में सरकार की नीतियों और नेतृत्व के खिलाफ अपनी मुखर आवाज उठाई है।

2. फेडोरोव ने किस बात की मांग की है?

उन्होंने मौजूदा युद्ध की स्थिति के बावजूद यूक्रेन में जल्द से जल्द 'युद्धकालीन चुनाव' (Wartime Elections) कराने की मांग की है।

3. इस राजनीतिक विवाद का रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या असर पड़ेगा?

इस आंतरिक कलह से यूक्रेन की राजनीतिक स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिसका सामरिक लाभ रूसी सेना युद्ध के मैदान में उठाने की कोशिश कर सकती है।

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Kavya Tripathi

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी एक अनुभवी Senior Editor और News Author हैं, जिन्होंने अब तक 450+ से ज़्यादा न्यूज़ स्टोरीज़ लिखी और एडिट की हैं। इनकी विशेषज्ञता ब्...

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