भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। लेकिन साल 2026 का रक्षाबंधन कुछ अलग और विशेष परिस्थितियों के साथ आ रहा है। इस बार राखी के पावन पर्व पर एक दुर्लभ खगोलीय घटना यानी चंद्र ग्रहण का साया मंडरा रहा है। ऐसे में देश भर के करोड़ों भाई-बहनों के मन में एक ही सवाल सबसे बड़ा है कि आखिर किस समय राखी बांधना सबसे शुभ रहेगा और क्या ग्रहण काल में यह पर्व मनाया जा सकता है?
रक्षाबंधन 2026 पर कब लग रहा है चंद्र ग्रहण?
पंचांग और खगोलीय गणना के अनुसार, साल 2026 में रक्षाबंधन यानी 28 अगस्त के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 38 मिनट की होगी। जब भी किसी बड़े त्योहार पर ग्रहण या सूतक काल का साया होता है, तो आम जनमानस में असमंजस की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि ग्रहण काल के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य, पूजा-पाठ और विशेषकर मांगलिक अनुष्ठान वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में राखी बांधने के समय को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी।
क्या 27 या 28 अगस्त—किस दिन मनाएं पर्व?
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और उसके समापन के समय को देखते हुए लोगों में यह भी चर्चा है कि क्या रक्षाबंधन 27 अगस्त को मनाया जाना चाहिए या निर्धारित तिथि 28 अगस्त को ही यह पर्व मचेगा। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि और भद्रा काल के साथ-साथ ग्रहण के सूतक को भी ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आमतौर पर सूतक काल ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही शुरू हो जाता है, जिसमें मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के नए कार्य की शुरुआत नहीं की जाती है।
राखी बांधने का सही और सटीक समय (Shubh Muhurat)
यदि आप भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि 28 अगस्त को राखी कब बांधी जाए, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहण के स्पर्श काल से पहले का समय ही सबसे उत्तम और सुरक्षित माना गया है।
- सुबह का सत्र: सूर्योदय के बाद से लेकर चंद्र ग्रहण के सूतक या ग्रहण आरंभ होने से पहले तक का समय राखी बांधने के लिए सबसे श्रेष्ठ रहेगा।
- भद्रा का विचार: चूंकि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया भी हमेशा एक बड़ा विषय रहता है, इसलिए पंचांग देखकर भद्रा रहित काल में ही भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें।
- विशेष सलाह: यदि दोपहर या शाम के समय ग्रहण का प्रभाव शुरू हो रहा है, तो उससे पहले ही यानी सुबह के वक्त ही सभी अनुष्ठान पूरे कर लेना बुद्धिमानी होगी।
ग्रहण काल और सूतक के दौरान क्या न करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए इस दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- ग्रहण काल या इसके सूतक के दौरान भाई को राखी न बांधें।
- इस अवधि में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श या भोजन पकाने और खाने से बचना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके पूरे घर की शुद्धि करें और दान-पुण्य अवश्य करें।
परिवार के साथ मनाएं यह पर्व, रखें सावधानियां
खगोलीय घटनाएं अपनी जगह पर हैं, लेकिन सनातन संस्कृति में पर्वों का अपना एक अलग आध्यात्मिक महत्व होता है। थोड़ा सा समय प्रबंधन करके और ज्योतिषीय नियमों का पालन करके आप इस रक्षाबंधन को पूरी तरह सुरक्षित और आनंदमय बना सकते हैं। अपने नजदीki पंडित जी या स्थानीय पंचांग के अनुसार सही मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें ताकि आपके घर में सुख, शांति और स्नेह का यह त्योहार बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
