सीमा पार की दूरियां और कड़े प्रशासनिक नियम अक्सर रिश्तों की राह में बड़ी दीवार बन जाते हैं। ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब भारत सरकार के एक कड़े सामरिक फैसले के बाद पाकिस्तान के सिंध प्रांत की कई बेटियों की शादियां अधर में लटक गई थीं। लेकिन अब महीनों के लंबे और तनावपूर्ण इंतज़ार के बाद आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पैदा हुए कड़े हालात के बीच, लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनें आखिरकार अपने पतियों के घर भारत पहुंच चुकी हैं।
अटारी बॉर्डर बंद होने से ठप हो गई थीं शादियां
पारंपरिक रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंध प्रांत के परिवारों का आना-जाना वाघा-अटारी बॉर्डर के जरिए काफी आसान रहा है। दशकों से दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले सिंधी समुदाय के लोग अपनी बेटियों की शादियां भारत के परिवारों में करते आए हैं। इसके लिए बॉर्डर पार करना और वीज़ा मिलना एक सामान्य प्रक्रिया हुआ करती थी।
हालांकि, यह सब तब बदल गया जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले, जिसमें 26 नागरिकों की जान चली गई थी, के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' सैन्य अभियान शुरू किया। इस सख्त सैन्य कार्रवाई के बाद सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत सरकार ने अटारी बॉर्डर के रास्ते आने वाले सभी वीज़ा और सीमा मार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए। इस अचानक लिए गए फैसले से भारत में तय हो चुकी कम से कम 150 पाकिस्तानी युवतियों की शादियां अचानक अधर में लटक गईं।
कैसे शुरू हुई वीज़ा मिलने की जद्दोजहद?
नागपुर के एक प्रमुख समुदायिक नेता राजेश झाम्बिया ने इस पूरी स्थिति पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि शादियां रुकने के बाद परिवारों में मायूसी छा गई थी। इसके बाद सिंधी समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल 'शदानी दरबार' के आध्यात्मिक प्रमुख, रायपुर स्थित संत युधिष्ठिरलाल शदानी से संपर्क किया।
शदानी दरबार ने पहल करते हुए उन तमाम पाकिस्तानी युवतियों की एक विस्तृत सूची तैयार की जिनकी सगाई भारत के युवकों से हो चुकी थी। इस सूची में नागपुर, रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के अन्य शहरों में ब्याही जाने वाली लगभग 150 दुल्हनों के नाम शामिल थे।
मंदिर के प्रतिनिधियों और समुदाय के नेताओं ने इस सूची को भारत के गृह मंत्रालय (MHA) के समक्ष रखा और मानवीय आधार पर वीज़ा जारी करने का आग्रह किया ताकि इन बेटियों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
सड़क मार्ग बंद, तो हवाई रास्तों से तय किया सफर
गृह मंत्रालय ने कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए एक बड़ी शर्त के साथ इन वीज़ा आवेदनों को हरी झंडी दी। शर्त यह थी कि वीज़ा धारक वाघा-अटारी के रास्ते यानी सड़क मार्ग से भारत में प्रवेश नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें केवल हवाई मार्ग (Flight) के जरिए ही देश में आना होगा।
चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी उड़ानें इस समय बंद हैं, इसलिए इन दुल्हनों और उनके परिवारों ने वैकल्पिक और महंगे हवाई मार्गों का सहारा लिया।
- मस्कट (ओमान)
- दुबई (संयुक्त अरब अमीरात)
- श्रीलंका
- बांग्लादेश और अन्य देशों के ट्रांजिट रूट्स
राजेश झाम्बिया ने पीटीआई को बताया, 'इसी साल अप्रैल से लेकर अब तक पाकिस्तान से 150 दुल्हनें और उनके परिजन दुबई, ओमान और श्रीलंका जैसे देशों के रास्ते ट्रांजिट उड़ानों से भारत पहुंच चुके हैं। अकेले नागपुर में ही ऐसी 15 शादियां संपन्न हुई हैं।'
अभी भी 300 से अधिक महिलाओं को है वीज़ा का इंतज़ार
भले ही 150 दुल्हनों और उनके परिवारों का भारत आना एक बड़ी राहत है, लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में अभी भी लगभग 300 ऐसी युवतियां और महिलाएं हैं जिनकी शादियां भारत में तय हैं और वे वीज़ा मिलने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हैं।
इन परिवारों ने भी भारतीय सरकार से अपील की है कि जिस तरह पहली खेप को नियमों के तहत आने की अनुमति दी गई, उसी तरह उन्हें भी वीज़ा जारी किया जाए ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत कर सकें।
