मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। तेहरान ने दावा किया है कि वह ओमान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए कमर्शियल शिपिंग को फिर से सुचारू करने के लिए एक फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है। हालांकि, ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता अपने आप खुल जाएगा।
अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से ईरान का इनकार
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री के मुताबिक, जब तक वाशिंगटन अपनी पुरानी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होगी। सबसे अहम बात यह है कि तेहरान ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी तरह की सीधी वार्ता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
सऊदी अरब पर मंडराया बड़े हमले का खतरा
इस बीच, पश्चिम एशिया में जंग का दायरा और चौड़ा होता दिख रहा है। सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने CNN को बताया कि देश अब 'दोहरे खतरे' का सामना कर रहा है। सऊदी अरब को अंदेशा है कि ईरान समर्थित यमनी हूथी विद्रोही और इराकी मिलिशिया एक साथ मिलकर उस पर बड़ा समन्वित (Coordinated) हमला कर सकते हैं।
- हूथी विद्रोहियों का दावा: यमन के उग्रवादी समूह ने कहा है कि उसने हाल ही में सऊदी सैनिकों के खिलाफ एक 'बड़े पैमाने पर' सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: इराकी मिलिशिया और हूथियों की साठगांठ से पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चरमरा सकती है।
हथियारों की कमी की खबरों से चिढ़े डोनाल्ड ट्रंप
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया रुख सामने आया है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ने निजी बातचीत में इस बात पर भारी नाराजगी जताई है कि पेंटागन के पास हथियारों का स्टॉक कम होने की रिपोर्ट्स लीक हो रही हैं। उनका मानना है कि इन जानकारियों से अंतरराष्ट्रीय पटल पर अमेरिका कमजोर नजर आता है।
हालांकि, अपने सार्वजनिक बयानों में ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका के पास 'पर्याप्त से भी ज्यादा' आधुनिक हथियार मौजूद हैं और देश किसी भी मोर्चे पर पीछे हटने वाला नहीं है।
भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। अगर इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ेगा, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।