धार्मिक नगरी काशी यानी वाराणसी की वीथियां इन दिनों एक बेहद खास और भावुक पल की गवाह बनीं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटने या किसी पारंपरिक अनुष्ठान के तहत, उनकी धर्मपत्नी चेनम्मा देवेगौड़ा के निमित्त पिंडदान और तर्पण का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान पूरा माहौल बेहद गमगीन और धार्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। आइए जानते हैं इस पूरी धार्मिक प्रक्रिया और मौके की खासियतों के बारे में।
काशी के पावन घाट पर पहुंचे परिजन
सनातन परंपरा में काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां अपने पितरों या परिजनों की आत्मा की शांति के लिए किए गए कर्मकांड सीधे ईश्वर के चरणों में पहुंचते हैं। पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा की पत्नी चेनम्मा देवेगौड़ा के लिए आयोजित इस अनुष्ठान में उनके परिवार के करीबी सदस्य और बेटे विशेष रूप से उपस्थित रहे। सुरक्षा के कड़े प्रबंधों और पूरी गोपनीयता के बीच यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
गंगा तट पर जब कर्मकांड शुरू हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। एक तरफ मां गंगा की कलकल बहती धारा और दूसरी तरफ वेदों के मंत्रोच्चार के बीच परिवार ने अपनी मां और धर्मपत्नी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
बेटे ने निभाईं सभी धार्मिक रस्में
हिन्दू संस्कृति के अनुसार, मोक्ष दायिनी गंगा के तट पर पिंडदान का विशेष महत्व होता है। परिवार के पुत्र ने आगे बढ़कर पूरी श्रद्धा और विधान के साथ पिंडदान की रस्मों को पूरा किया। पंडितों के मार्गदर्शन में मंत्रोच्चार के बीच तर्पण किया गया। इस दौरान बेटे के चेहरे पर साफ तौर पर अपने प्रियजन को खोने का दर्द और मां के प्रति अगाध श्रद्धा का भाव झलक रहा था।
- स्थान: वाराणसी के प्रमुख और पवित्र घाट।
- मुख्य रस्म: पिंडदान और ब्राह्मण भोज।
- उपस्थिति: परिवार के चुनिंदा करीबी सदस्य और स्थानीय पुरोहित।
नम आंखें और भारी मन
राजनीति के गलियारों में हमेशा मजबूत और सख्त नजर आने वाले परिवारों के ऐसे व्यक्तिगत और संवेदनशील पल अक्सर लोगों को झकझोर देते हैं। जब पिंडदान की प्रक्रिया चल रही थी, तब वहां मौजूद लोगों ने बताया कि माहौल बेहद भावुक था। हर किसी की आंखें नम थीं। परिवार के सदस्यों ने गंगा में डुबकी लगाकर और दीपदान कर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की।
काशी में पिंडदान का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के मुताबिक, काशी में मृत्यु या उसके पश्चात किए जाने वाले कर्मकांडों का अनंत फल मिलता है। ऐसा विश्वास है कि बाबा विश्वनाथ की नगरी में तर्पण करने से आत्मा को चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है और वैकुंठ की प्राप्ति होती है। पूर्व पीएम देवेगौड़ा के परिवार द्वारा इस परंपरा का निर्वहन करना यह दर्शाता है कि वे अपनी संस्कृति और सनातन मूल्यों से कितने गहरे जुड़े हुए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: चेनम्मा देवेगौड़ा कौन हैं?
Ans: चेनम्मा देवेगौड़ा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की धर्मपत्नी हैं।
Q2: काशी में ही पिंडदान क्यों किया जाता है?
Ans: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, काशी (वाराणसी) को मुक्तिधाम माना जाता है। यहां पिंडदान करने से पूर्वजों और दिवंगत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Q3: इस अनुष्ठान में मुख्य रूप से कौन शामिल हुआ?
Ans: इस धार्मिक अनुष्ठान में पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्य और उनके बेटे शामिल हुए, जिन्होंने पूरी विधि-विधान से रस्में निभाईं।