भारतीय राजनीति में इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन को लेकर बयानबाजी का दौर चरम पर है। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे द्वारा आरएसएस के पंजीकरण की मांग उठाए जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष ने इस पर तीखा और स्पष्ट पलटवार किया है। बंगलूरू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बीएल संतोष ने दो टूक कहा कि आरएसएस को अपनी पहचान स्थापित करने या अपना अस्तित्व साबित करने के लिए किसी भी तरह के औपचारिक पंजीकरण की कोई आवश्यकता नहीं है।
पंजीकरण से तय नहीं होता किसी संगठन का वजूद: बीएल संतोष
बंगलूरू में हिंदू जागरण वेदिके के 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीएल संतोष ने कहा कि आरएसएस जब देश के विभाजन के समय सक्रिय था, तब भी वह पंजीकृत नहीं था और आज भी उसका औपचारिक रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसके बावजूद यह संगठन देश के कोने-कोने में सुचारू रूप से काम कर रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा, "पंजीकरण किसी संगठन का अस्तित्व या उसकी प्रमाणिकता तय नहीं करता है। आरएसएस कागजी औपचारिकताओं से नहीं, बल्कि देश के लाखों-करोड़ों लोगों के अटूट भरोसे और जन-समर्थन के बल पर चलता है।"
आजादी को लेकर दिए गए बयानों पर चर्चा
अपने संबोधन के दौरान बीएल संतोष ने देश की आजादी के इतिहास को याद करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत को स्वतंत्रता केवल चरखा चलाने या नमक सत्याग्रह आंदोलनों मात्र से नहीं मिली थी। इसके पीछे देश के हजारों ज्ञात और अज्ञात क्रांतिकारियों का खून और उनका सर्वोच्च बलिदान शामिल था।
उन्होंने मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि देश के 80वें स्वतंत्रता वर्ष के इस पड़ाव पर हमें उनके त्याग को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा,
"यह मान लेना बिल्कुल गलत होगा कि अंग्रेजों ने हमें खैरात में या तोहफे के रूप में आजादी दी थी। इसके लिए हमारे वीर सैनिकों और देशभक्त युवाओं ने अपनी जानें दांव पर लगाई थीं।"
हिंदू आबादी और जनसांख्यिकी बदलाव पर बड़ा दावा
कार्यक्रम के दौरान बीएल संतोष ने जनसांख्यिकी (Demography) बदलाव और हिंदू आबादी के घटने-बढ़ने के मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि किसी भी क्षेत्र में यदि हिंदू आबादी कम होती है, तो वहां राष्ट्र से जुड़ाव की भावना भी कमजोर पड़ने लगती है।
उन्होंने बंगलूरू की कुछ विशेष विधानसभा सीटों, जैसे शिवाजीनगर और चामराजपेट का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले दो दशकों से वहां किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है। उन्होंने राजनीतिक दलों को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें अगले चुनावों में वहां से हिंदू उम्मीदवारों को मैदान में उतारना चाहिए।
संतोष ने सवालिया लहजे में कहा, "हिंदुओं को बहुमत में क्यों रहना चाहिए? यह किसी को हराने के लिए नहीं है, बल्कि इसलिए जरूरी है ताकि भारत, भारत ही बना रहे।" उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में आए बदलाव और मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी से जोड़ा।
'अखंड भारत' को लेकर क्या बोले बीएल संतोष?
लेख के अंत में उन्होंने 'अखंड भारत' के संकल्प को दोहराते हुए इसे केवल एक प्रशासनिक सपना मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक और गहरी राष्ट्रवादी चेतना से जुड़ा विचार है।
- ऐतिहासिक उदाहरण: उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण के साथ-साथ वियतनाम के एक होने का हवाला दिया।
- युवाओं से अपील: उन्होंने आह्वान किया कि हर भारतीय को यह संकल्प लेना चाहिए कि हमारे बीच के बुजुर्ग अपने जीवनकाल में अखंड भारत का सपना अपनी आंखों से देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: बीएल संतोष ने आरएसएस के पंजीकरण पर क्या कहा?
Ans: बीएल संतोष ने स्पष्ट किया कि आरएसएस को अपनी पहचान के लिए किसी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह कागजों से नहीं बल्कि लाखों लोगों के भरोसे और समर्थन से चलता है।
Q2: प्रियांक खरगे ने क्या मांग की थी?
Ans: कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने आरएसएस की गतिविधियों और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसके आधिकारिक पंजीकरण की मांग की थी।
Q3: 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था?
Ans: यह कार्यक्रम कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में हिंदू जागरण वेदिके द्वारा आयोजित किया गया था।