Breaking
► जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर पलटीं बीजेपी विधायक सर्बरी मुखर्जी, एबीवीपी से बनाई दूरी ► अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, तेहरान ने दी तीखी प्रतिक्रिया ► बिहार की पुष्पा का कमाल: बच्चों को खेल-खेल में पढ़ा, मिला राष्ट्रपति सम्मान ► दिल्ली में एडोब के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बेरहमी से हत्या, फेफड़े कुचलने का आरोप ► दिल्ली मुख्यालय में पीएम मोदी की नई टीम के साथ अहम बैठक, वंदे मातरम पर बड़ा प्रस्ताव पास ► वंदे मातरम पर आरपार: बीजेपी के 10-सूत्री प्रस्ताव में क्या है खास? ► तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल: DMK ने किए कड़े बदलाव, अब तय होगी उम्र सीमा ► चंदौली में राजनीतिक सरगर्मी तेज: इंडियन जन सेवा दल की बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन ► चंदौली में दर्दनाक हादसा: कुएं से समरसेबल निकालते वक्त जहरीली गैस से तीन की मौत ► Hyderabad Building Collapse: मधापुर में ढही 7 मंजिला अवैध इमारत, 2 की मौत ► जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर पलटीं बीजेपी विधायक सर्बरी मुखर्जी, एबीवीपी से बनाई दूरी ► अमेरिका के नए प्रतिबंधों पर भड़का ईरान, तेहरान ने दी तीखी प्रतिक्रिया ► बिहार की पुष्पा का कमाल: बच्चों को खेल-खेल में पढ़ा, मिला राष्ट्रपति सम्मान ► दिल्ली में एडोब के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की बेरहमी से हत्या, फेफड़े कुचलने का आरोप ► दिल्ली मुख्यालय में पीएम मोदी की नई टीम के साथ अहम बैठक, वंदे मातरम पर बड़ा प्रस्ताव पास ► वंदे मातरम पर आरपार: बीजेपी के 10-सूत्री प्रस्ताव में क्या है खास? ► तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल: DMK ने किए कड़े बदलाव, अब तय होगी उम्र सीमा ► चंदौली में राजनीतिक सरगर्मी तेज: इंडियन जन सेवा दल की बैठक में चुनावी रणनीति पर मंथन ► चंदौली में दर्दनाक हादसा: कुएं से समरसेबल निकालते वक्त जहरीली गैस से तीन की मौत ► Hyderabad Building Collapse: मधापुर में ढही 7 मंजिला अवैध इमारत, 2 की मौत

बिहार की पुष्पा का कमाल: बच्चों को खेल-खेल में पढ़ा, मिला राष्ट्रपति सम्मान

बिहार की पुष्पा का कमाल: बच्चों को खेल-खेल में पढ़ा, मिला राष्ट्रपति सम्मान

बिहार के गोपालगंज जिले की एक साधारण सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने अपनी मेहनत और अनोखी शिक्षण शैली से पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर दिया है। कुचायकोट प्रखंड के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में पढ़ाने वाली पुष्पा प्रसाद को इस वर्ष के प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026' के लिए चुना गया है। बच्चों को किताबी कीड़े बनाने के बजाय उन्हें खेल-खेल में और गतिविधियों के माध्यम से जटिल विषय आसानी से समझाने की उनकी अनूठी कला ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है। आगामी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें इस prestigious सम्मान से सम्मानित करेंगी।

कठिन विषयों को आसान बनाने का अनोखा तरीका

अक्सर यह माना जाता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और तौर-तरीके पुराने और उबाऊ होते हैं, लेकिन पुष्पा प्रसाद ने इस धारणा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। उन्होंने अपनी कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाने के लिए पारंपरिक रटने की पद्धति को अलविदा कह दिया। इसके बजाय, उन्होंने खेल-खेल में सीखना (Learning through Play) और गतिविधि-आधारित शिक्षा (Activity-Based Learning) को अपनाया।

गणित और विज्ञान जैसे विषयों से अक्सर छात्र डरते हैं, लेकिन पुष्पा की कक्षा में इन विषयों को गीतों, नाटकों, पहेलियों और स्थानीय सामग्रियों से बने टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) के जरिए समझाया जाता है। उनके इस नवाचारी (Innovative) दृष्टिकोण ने न केवल कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाई है, बल्कि उनकी पठन-पाठन में रुचि भी गहरी कर दी है।

देशभर के चुनिंदा 48 शिक्षकों में शुमार

शिक्षा मंत्रालय द्वारा हर साल देश भर के सबसे बेहतरीन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष (2026) पूरे देश से केवल 48 शिक्षकों का चयन इस अत्यंत प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए किया गया है, और गर्व की बात यह है कि इस सूची में बिहार से पुष्पा प्रसाद का नाम भी शामिल है। यह चयन प्रक्रिया बेहद कठिन होती है, जिसमें शिक्षकों के नवाचार, उनके द्वारा समाज और स्कूल में किए गए बदलाव और छात्रों के शैक्षणिक विकास का बारीकी से मूल्यांकन किया जाता है।

गोपालगंज से लेकर राष्ट्रीय पटल तक का सफर

पुष्पा प्रसाद का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। संसाधन सीमित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च करके स्कूल को संवारने और बच्चों के लिए आधुनिक शिक्षण सामग्रियां जुटाने का काम किया। स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच भी उनकी यह शैली बेहद लोकप्रिय हो गई है। आज स्थिति यह है कि उनके स्कूल के बच्चे रोजाना पूरे उत्साह के साथ विद्यालय पहुंचते हैं और बिना किसी मानसिक दबाव के हंसते-खेलते नई चीजें सीखते हैं।

  • खेल-खेल में शिक्षा: बच्चों को जटिल सिद्धांत आसानी से खेल के माध्यम से समझाना।
  • कम लागत वाले टीएलएम: बेकार पड़ी चीजों से शिक्षण सामग्री तैयार करना।
  • बाल-केन्द्रित शिक्षा: छात्र की रुचि के अनुसार पढ़ाने के तरीकों में बदलाव करना।
  • अभिभावकों की भागीदारी: शिक्षा के प्रति समाज और माता-पिता को जागरूक करना।

5 सितंबर को नई दिल्ली में मिलेगा सम्मान

शिक्षक दिवस यानी 5 सितंबर को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होने वाले भव्य राष्ट्रीय समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुष्पा प्रसाद को इस सम्मान से नवाजेंगी। इस पुरस्कार में एक प्रमाण पत्र, रजत पदक और पचास हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है। इस घोषणा के बाद से ही गोपालगंज जिले सहित पूरे बिहार के शिक्षा जगत में जश्न का माहौल है। स्कूल के बच्चों, शिक्षकों और जिला प्रशासन ने पुष्पा प्रसाद को बधाई दी है और इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया है।

प्रेरणास्रोत बनीं पुष्पा प्रसाद

पुष्पा प्रसाद की यह सफलता उन सभी शिक्षकों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो संसाधन न होने का रोना रोते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि पढ़ाने का जज्बा सच्चा हो और बच्चों के प्रति समर्पण हो, तो सरकारी स्कूलों की तस्वीर को भी पूरी तरह बदला जा सकता है। उनकी यह कहानी आने वाली पीढ़ियों और शिक्षकों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

About the Author

🧑‍💼 गुंजा पांडेय (Sports & Science)

🧑‍💼 गुंजा पांडेय (Sports & Science)

Chief Sub Editor

गुंजा पांडेय तेज़ी से बदलती खबरों की दुनिया में अपनी पकड़ के लिए जानी जाती हैं। वे खेल और विज्ञान जैसे विषयों को न सिर्फ अपडेटेड रखती हैं, बल्कि उन...

Read More