क्या न्याय के लिए अपनों की अर्थी उठाने वाले परिवारों को महीनों इंतजार करना पड़ेगा? यह सवाल आज राजस्थान के फलोदी जिले की हवा में गूंज रहा है, जहां एक दिल दहला देने वाली घटना के 22 दिन बीत जाने के बाद भी खाकी के हाथ पूरी तरह खाली हैं। जंभेश्वर नगर (लोहावट) में हुई भंवरी देवी विश्नोई की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस की नाकामी के खिलाफ मंगलवार को जनता का सब्र आखिरकार टूट ही गया। न्याय की आस में सड़कों पर उतरे लोगों का गुस्सा ऐसा फूटा कि पूरा जिला मुख्यालय छावनी में तब्दील हो गया।
कलक्ट्रेट पर उमड़ा जनसैलाब, तोड़े गए बेरिकेड्स
मंगलवार को लोहावट इलाके से हजारों की संख्या में ग्रामीण और महिलाएं फलोदी जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम सीधे कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा। हालात इतने बेकाबू हो गए कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के सुरक्षा घेरे और बेरिकेड्स को तोड़कर कलक्ट्रेट परिसर में धावा बोल दिया।
कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के बाहर जोरदार नारेबाजी की गई। स्थिति को भांपते हुए प्रशासन ने पहले ही मुख्य गेट बंद कर दिए थे, लेकिन जनसैलाब के दबाव के आगे पुलिस के इंतजाम बौने साबित हुए। इस दौरान कुछ जगहों पर तनावपूर्ण स्थिति भी बनी, जब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी हुई। हालांकि, पूर्व विधायक किसनाराम विश्नोई ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और उग्र हो रही भीड़ को शांत कराया।
महिलाओं का प्रदर्शन और सुरक्षा पर बड़े सवाल
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी तस्वीर महिलाओं की मुखर भागीदारी रही। बड़ी संख्या में घूंघट की आड़ में पहुंची महिलाओं ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी। महिलाओं ने सवाल उठाया कि अगर एक घर में सो रही मां और उसकी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करे? महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द कातिलों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो आंदोलन को और भी ज्यादा उग्र किया जाएगा।
प्रशासन के साथ वार्ता विफल, कलक्ट्रेट पर महापड़ाव शुरू
बढ़ते दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक किसनाराम विश्नोई, कांग्रेस नेता प्रकाश छंगाणी, कुम्भसिंह पातावत, महिपाल भादू और भागीरथ बेनिवाल शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक सतनाम सिंह से मुलाकात की। अधिकारियों ने अब तक की गई तफ्तीश के बारे में बताया, लेकिन पीड़ित पक्ष और स्थानीय नेता पुलिस की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नजर नहीं आए। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि:
- लोहावट थानाधिकारी (SHO) को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाए।
- वृताधिकारी (CO) को जिले से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
- हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए।
मांगें पूरी न होने पर पूर्व विधायक किसनाराम विश्नोई ने कलक्ट्रेट परिसर में ही महापड़ाव का ऐलान कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक लापरवाह अधिकारियों का तबादला नहीं होता और हत्यारे बेनकाब नहीं होते, तब तक यह महापड़ाव और लोहावट का धरना यूं ही जारी रहेगा।
क्या है पूरा मामला? जानिए 27-28 जुलाई की वो खौफनाक रात
यह पूरा सनसनीखेज मामला फलोदी जिले के लोहावट थाना क्षेत्र के जंभेश्वर नगर का है। बीती 27-28 जुलाई की सर्द या डरावनी रात (ठीक रात 1 बजे), जब हर कोई गहरी नींद में था, तब 32 वर्षीय भंवरी विश्नोई अपने घर के बाहर सो रही थी। तभी अज्ञात हमलावरों ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए बेरहमी से उसका गला रेत दिया।
इस दौरान जब मां की चीखें निकलीं, तो उसे बचाने के लिए उसकी 16 वर्षीय बेटी रामज्योति और 10 वर्षीय छोटी बेटी बीच-बचाव करने दौड़ीं। हैवानियत की हद तो यह है कि हमलावरों ने उन बच्चियों को भी नहीं बख्शा और उन पर भी हमला कर दिया, जिससे वे भी गंभीर रूप से घायल हो गईं।
मृतका के पिता ओमप्रकाश ने मीडिया को दिए बयानों में बताया था कि उनकी बेटी की किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी। भंवरी का पति गंगाविशन विश्नोई एक साधारण ट्रक चालक है, जो परिवार का पेट पालने के लिए बाहर रहता है। ऐसे में एक साधारण परिवार की महिला पर इस तरह का बर्बर हमला और 22 दिनों तक पुलिस के हाथ खाली रहना कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
अब आगे क्या?
भंवरी देवी हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था की एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। जनता की सड़कों पर उतरी भीड़ और राजनीतिक दिग्गजों के महापड़ाव ने भजनलाल सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। देखना यह होगा कि इस राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बाद पुलिस कब तक असली कातिलों को ढूंढकर जनता के सामने लाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: भंवरी देवी हत्याकांड कब और कहां हुआ था?
Ans: यह घटना 27-28 जुलाई की रात को राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट थाना क्षेत्र के जंभेश्वर नगर में हुई थी, जहां घर के बाहर सो रही भंवरी विश्नोई की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।
Q2: लोग फलोदी कलक्ट्रेट क्यों पहुंचे थे?
Ans: घटना के 22 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस हत्यारों का सुराग लगाने में नाकाम रही है। इसी लापरवाही और पुलिस की कार्यप्रणाली के विरोध में ग्रामीण और परिजन कलक्ट्रेट का घेराव करने पहुंचे थे।
Q3: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
Ans: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि हत्याकांड के असली आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। इसके साथ ही, कथित रूप से मामले में ढिलाई बरतने वाले लोहावट थानाधिकारी और वृताधिकारी को जिले से बाहर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर महापड़ाव जारी है।