Breaking
► टुपैक शाकुर हत्याकांड: डिफेंस वकील की हैरान करने वाली रणनीति ► एशिया का सबसे अमीर शख्स अब सलाखों के पीछे, चीन के प्रॉपर्टी किंग का ऐसा हुआ बुरा हाल ► कल 21 अगस्त का मौसम: 27 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 90 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं ► ईरान में खूनी फरमान: सत्ता को चुनौती देने वाले विदेशी नागरिक को दी गई फांसी ► कन्या राशि वाले हो जाएं सावधान! आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पंडित सुरेश पांडेय की चेतावनी ► बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: भारत से कैसे अलग है पड़ोसी मुल्क की मतदान प्रक्रिया, जानिए पूरी दिलचस्प कहानी ► लखनऊ में खौफनाक वारदात: बैंक के बाहर पति ने पत्नी और बहन को गोलियों से भूना, फिर खुद को भी उड़ाया ► लियोनल मेसी की मैदान पर जादुई वापसी, पिता को समर्पित किया इमोशनल गोल ► अब हंसना नहीं रोना है ट्रेंड! साल 2025 में इस एक इमोजी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड ► 1 लीटर पेट्रोल में 28 किमी का सफर! ये हैं भारत की सबसे दमदार हाइब्रिड कारें ► टुपैक शाकुर हत्याकांड: डिफेंस वकील की हैरान करने वाली रणनीति ► एशिया का सबसे अमीर शख्स अब सलाखों के पीछे, चीन के प्रॉपर्टी किंग का ऐसा हुआ बुरा हाल ► कल 21 अगस्त का मौसम: 27 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, 90 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं ► ईरान में खूनी फरमान: सत्ता को चुनौती देने वाले विदेशी नागरिक को दी गई फांसी ► कन्या राशि वाले हो जाएं सावधान! आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें, पंडित सुरेश पांडेय की चेतावनी ► बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: भारत से कैसे अलग है पड़ोसी मुल्क की मतदान प्रक्रिया, जानिए पूरी दिलचस्प कहानी ► लखनऊ में खौफनाक वारदात: बैंक के बाहर पति ने पत्नी और बहन को गोलियों से भूना, फिर खुद को भी उड़ाया ► लियोनल मेसी की मैदान पर जादुई वापसी, पिता को समर्पित किया इमोशनल गोल ► अब हंसना नहीं रोना है ट्रेंड! साल 2025 में इस एक इमोजी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड ► 1 लीटर पेट्रोल में 28 किमी का सफर! ये हैं भारत की सबसे दमदार हाइब्रिड कारें

बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: भारत से कैसे अलग है पड़ोसी मुल्क की मतदान प्रक्रिया, जानिए पूरी दिलचस्प कहानी

बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: भारत से कैसे अलग है पड़ोसी मुल्क की मतदान प्रक्रिया, जानिए पूरी दिलचस्प कहानी

पड़ोसी देश बांग्लादेश में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। करीब 35 साल के लंबे अंतराल के बाद वहां राष्ट्रपति पद के लिए सीधी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल रही है। यह चुनाव इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि पिछले कई दशकों से बांग्लादेश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अमूमन औपचारिकता मात्र रहते थे और उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए जाते थे। लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा है और पूरी दुनिया की नजरें ढाका पर टिकी हुई हैं।

संसद भवन में होगा मतदान और कल होगी ताजपोशी

बांग्लादेश की संसद में आज दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी और उसके तुरंत बाद चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प है। सत्तारूढ़ दल बीएनपी (BNP) ने अपने दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को मैदान में उतारा है, जिनका मुकाबला 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद से है।

चूंकि संसद में सत्तारूढ़ बीएनपी के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत की संभावनाएं सबसे ज्यादा प्रबल मानी जा रही हैं। चुनाव प्रक्रिया के तुरंत बाद, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कल शुक्रवार की शाम को ऐतिहासिक बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे।

क्यों खाली हुआ था राष्ट्रपति का पद?

इस सियासी हलचल की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो 22वें राष्ट्रपति रहे मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद खाली चल रहा था। इस दौरान हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में देश की कमान संभाल रहे थे। संविधान के नियमों के तहत कार्यकाल पूरा होने से पहले पद खाली होने पर जल्द से जल्द चुनाव कराना अनिवार्य होता है, जिसके चलते आज यह मतदान हो रहा है।

कैसा रहा है बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनावों का इतिहास?

बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में राष्ट्रपति चुनाव के नियम समय-समय पर बदलते रहे हैं। देश के गठन के बाद से अब तक कुल 12 राष्ट्रपति चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से आश्चर्यजनक रूप से 8 बार राष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए थे।

  • 1974: बांग्लादेश के गठन के बाद पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ, जिसमें मोहम्मद मोहम्मदुल्लाह विजयी रहे।
  • 1975-1986: साल 1975 में संविधान में संशोधन किया गया जिसके तहत राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा वोटिंग के जरिए कराने का प्रावधान जोड़ा गया। इसके तहत 1978, 1981 और 1986 में जनता ने सीधे वोट डालकर राष्ट्रपति चुने।
  • 1991 के बाद का बदलाव: साल 1991 में देश में दोबारा संसदीय व्यवस्था लागू की गई, जिसके बाद से जनता की बजाय सांसदों के वोटों के जरिए राष्ट्रपति चुने जाने की परंपरा शुरू हुई।

दिलचस्प बात यह है कि 1991 के बाद से 2023 तक के सभी राष्ट्रपति चुनाव निर्विरोध हुए। विपक्षी दल अक्सर अपने उम्मीदवार उतारने से बचते रहे क्योंकि उन्हें संसद में बहुमत न होने के कारण अपनी हार का अंदेशा रहता था। यही वजह है कि 35 साल बाद हो रहा यह मुकाबला ऐतिहासिक माना जा रहा है।

क्या कहता है संविधान और कैसे होती है चुनाव प्रक्रिया?

मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन के अनुसार, बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव 'अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली' के तहत होता है। भारत की तरह यहां आम नागरिक सीधे राष्ट्रपति को वोट नहीं डालते, बल्कि संसद में जनता द्वारा चुने गए सांसद ही मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं।

संविधान के नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कार्यकाल: राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल का होता है।
  • सीमा: बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।
  • कार्यवाहक व्यवस्था: यदि 5 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले पद खाली होता है, तो संसद के स्पीकर (अध्यक्ष) कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं जब तक कि नया राष्ट्रपति नहीं चुन लिया जाता।
  • राजनीतिक समीकरण: हालांकि चुनाव वोटिंग के जरिए होता है, लेकिन संसद में बहुमत प्राप्त सत्तारूढ़ दल के पास संख्याबल होने के कारण अक्सर उसी दल का उम्मीदवार इस सर्वोच्च पद पर आसीन होता है।

भारत से कितनी अलग है मतदान प्रणाली?

जब हम भारत और बांग्लादेश की चुनाव प्रणालियों की तुलना करते हैं, तो दोनों देशों के सिस्टम में बुनियादी अंतर नजर आता है। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ-साथ सभी राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक भी इलेक्टोरल कॉलेज का हिस्सा बनकर वोट डालते हैं। इसके विपरीत, बांग्लादेश में केवल देश की संसद (जातीय संसद) के सदस्य ही राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करते हैं, और वहां प्रांतीय विधानसभाओं का ऐसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं है क्योंकि वह एक एकात्मक (Unitary) शासन वाला देश है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है और एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में अधिकतम दो बार ही इस पद पर रह सकता है।

2. क्या बांग्लादेश में आम जनता राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालती है?

नहीं, बांग्लादेश में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होता है, जहां केवल संसद सदस्य (MPs) ही मतदान करते हैं। इतिहास में कुछ समय के लिए प्रत्यक्ष चुनाव का नियम आया था, लेकिन 1991 से संसदीय प्रणाली के तहत सांसदों द्वारा ही चुनाव किया जाता है।

3. बांग्लादेश के वर्तमान कार्यवाहक राष्ट्रपति कौन हैं?

मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद से हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जो आज होने वाले चुनाव के परिणामों के बाद नए राष्ट्रपति को कार्यभार सौंपेंगे।

✍️

रिपोर्टर: Alka Singh

यह खबर हमारी एडिटोरियल टीम द्वारा पूरी रिसर्च और प्रामाणिकता के साथ पब्लिश की गई है। हम आप तक सबसे सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।