क्रिकेट जगत में पाकिस्तान की पहचान हमेशा से रफ्तार के सौदागरों यानी खतरनाक तेज गेंदबाजों की वजह से रही है। इमरान खान से लेकर वसीम अकरम, वकार यूनिस और शोएब अख्तर जैसे दिग्गजों ने विश्व क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया है। लेकिन, पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की यह सबसे बड़ी ताकत उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है। टीम में अब वह धारदार और खौफ पैदा करने वाला पेस अटैक नजर नहीं आता।
अब इस गिरावट के लिए सीधे तौर पर पूर्व कप्तान बाबर आजम को कटघरे में खड़ा किया गया है। पाकिस्तान की पूर्व महिला क्रिकेटर और जानी-मानी विश्लेषक उरोज मुमताज ने बाबर आजम की कप्तानी और उनकी रणनीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, बाबर की एक जिद ने पाकिस्तान क्रिकेट से उसके सबसे बड़े हथियार यानी तेज गेंदबाजी को छीन लिया है।
फ्लैट ट्रैक की मांग और तेज गेंदबाजों का पतन
स्काई स्पोर्ट्स पर चर्चा के दौरान उरोज मुमताज ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखी। उन्होंने खुलकर बताया कि कैसे बाबर आजम के कप्तान बनने के बाद घरेलू क्रिकेट और पिचर्स के मिजाज में बदलाव आया, जिसने युवा तेज गेंदबाजों के करियर को गहरी चोट पहुंचाई है।
उरोज ने कहा, "बल्लेबाजों के मोह में पड़कर हम अपने तेज गेंदबाजों से दूर होते चले गए। बाबर आजम बतौर कप्तान हमेशा ऐसे फ्लैट ट्रैक चाहते थे जहां सिर्फ बल्लेबाजों का बोलबाला रहे और रन आसानी से बनते रहें। स्थिति यहां तक पहुंच गई कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट की पिचों से भी हरी घास को पूरी तरह हटा दिया गया।"
उन्होंने आगे कहा कि जब आप घरेलू स्तर पर पिचों से गेंदबाजों को मिलने वाली मदद छीन लेते हैं, तो आप अनजाने में ही सही, लेकिन अपने तेज गेंदबाजों को बेहद मुश्किल में डाल रहे होते हैं। इससे नुकसान यह हुआ कि बिना किसी कठिन परीक्षा के बल्लेबाज केवल फ्लैट पिचों पर रन बनाते रहे, लेकिन देश को मिलने वाले क्वालिटी पेसर्स का ग्राफ नीचे गिरता चला गया।
घरेलू क्रिकेट की अनदेखी पड़ी भारी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की बेंच स्ट्रेंथ उसकी घरेलू क्रिकेट की पिचों और वहां के प्रतिस्पर्धी माहौल से तय होती है। पाकिस्तान में एक दौर था जब पिचों पर घास होती थी, सीम मूवमेंट मिलता था और बल्लेबाज को क्रीज पर टिकने के लिए पसीना बहाना पड़ता था। इसी संघर्ष ने दुनिया को शोएब अख्तर और मोहम्मद आमेर जैसे गेंदबाज दिए।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आधुनिक क्रिकेट की चकाचौंध और हाई-स्कोरिंग मुकाबलों के चक्कर में पिचों का चरित्र बदल दिया गया। सपाट पिचों पर गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं बचा, जिससे युवा खिलाड़ियों ने गेंदबाजी से ज्यादा बल्लेबाजी में रुचि दिखाई या फिर वे अपनी गति खो बैठे।
इंग्लैंड के खिलाफ शर्मनाक प्रदर्शन से खुली पोल
पाकिस्तान क्रिकेट की इस पोल पट्टी तब और खुलकर सामने आई जब मैदान पर टीम का प्रदर्शन फिसड्डी साबित हुआ। हालिया मुकाबलों में भी पाकिस्तानी बल्लेबाजी की तकनीक पर सवाल उठे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में पूरी पाकिस्तानी टीम महज 171 रनों पर ढेर हो गई थी।
हालाँकि अब्दुल्ला शफीक (61 रन) और इमाम उल हक (42 रन) ने टिकने की कोशिश की, लेकिन इंग्लिश गेंदबाजों (खासकर जोश टंग और ओली रॉबिन्सन) के आगे पूरी पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि जब तक घरेलू स्तर पर चुनौतीपूर्ण पिचें दोबारा तैयार नहीं होंगी, तब तक पाकिस्तान अपनी खोई हुई गेंदबाजी विरासत को वापस नहीं पा सकता।
निष्कर्ष
एक तरफ जहां विराट कोहली, रोहित शर्मा और स्टीव स्मिथ जैसे आधुनिक बल्लेबाज चुनौतियों का सामना करने के लिए जाने जाते हैं, वहीं पाकिस्तान के रणनीतिकारों का यह सोचना कि केवल फ्लैट पिचों पर खेलकर टीम विश्व विजेता बन सकती है, भारी पड़ रहा है। उरोज मुमताज के इन बयानों ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और खिलाड़ियों के बीच आंतरिक रणनीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. उरोज मुमताज ने बाबर आजम पर क्या आरोप लगाया है?
उरोज मुमताज का आरोप है कि बाबर आजम ने अपनी कप्तानी के दौरान हमेशा बल्लेबाजी के अनुकूल फ्लैट ट्रैक की मांग की, जिससे घरेलू पिचों से घास हटा दी गई और इसका सीधा नुकसान पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों को उठाना पड़ा।
2. पाकिस्तान क्रिकेट की पहचान किन तेज गेंदबाजों से रही है?
पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास में वसीम अकरम, वकार यूनिस, शोएब अख्तर, और वकार यूनिस जैसे महान तेज गेंदबाज शामिल रहे हैं जिन्होंने अपनी रफ्तार से पूरी दुनिया में खौफ पैदा किया था।
3. क्या सपाट पिचों से तेज गेंदबाजों को नुकसान होता है?
जी हां, सपाट पिचों पर गेंदबाजों को न तो स्विंग मिलती है और न ही पिच से कोई मदद, जिससे उनकी गेंदबाजी की धार कमजोर हो जाती है और वे विकेट लेने के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं।