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आर्टिकल 370 के 7 साल: UN ने फिर उठाया कश्‍मीर का मुद्दा, भारत ने दिया कड़ा संदेश

आर्टिकल 370 के 7 साल: UN ने फिर उठाया कश्‍मीर का मुद्दा, भारत ने दिया कड़ा संदेश

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) को निरस्त किए जाने के 7 साल पूरे होने के मौके पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर टिप्पणी की है। UN मुख्यालय में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता ने कश्मीर के लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों के संरक्षण की बात कही। दूसरी ओर, भारत ने अपने कूटनीतिक रुख को दोहराते हुए साफ कर दिया है कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का संप्रभु और आंतरिक मामला है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

UN का बयान: सुरक्षा परिषद के 1949 के प्रस्ताव का उल्लेख

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रवक्ता ने एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि वैश्विक संस्था कश्मीर की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रवक्ता ने कहा, "आप कश्मीर की स्थिति पर 1949 के सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से अच्छी तरह वाकिफ हैं... मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (OHCHR) ने चिंता जताई थी कि कश्मीर के लोगों के बुनियादी नागरिक और मानवाधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।"

उल्लेखनीय है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद सुरक्षा कारणों से घाटी में लगाई गई अस्थायी पाबंदियों और इंटरनेट निलंबन को लेकर भी UN मानवाधिकार आयोग ने बयान जारी किए थे।

भारत का दोटूक जवाब: 'शिमला समझौते के तहत द्विपक्षीय मामला'

भारत सरकार ने UN की इस टिप्पणी पर अपनी कूटनीतिक स्थिति फिर स्पष्ट की है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि:

  • पूर्णतः आंतरिक फैसला: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाना और जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन पूरी तरह से भारत का आंतरिक और संवैधानिक अधिकार है।
  • द्विपक्षीय ढांचा: 1972 के ऐतिहासिक शिमला समझौते (Shimla Agreement) और 1999 के लाहौर घोषणापत्र के तहत भारत-पाकिस्तान के बीच सभी लंबित मुद्दों का समाधान सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत से होगा।
  • तीसरे पक्ष की नो एंट्री: कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी विदेशी राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय संस्था या UN की मध्यस्थता भारत को कभी स्वीकार्य नहीं रही है।

7 सालों में कितना बदला कश्मीर?

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया था।

बीते 7 वर्षों में घाटी में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों का आगमन, अवसंरचना (Infrastructure) का विकास और आतंकवाद में कमी जैसे बड़े बदलाव देखे गए हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर PDP और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसी राजनीतिक पार्टियां इस फैसले के खिलाफ अपनी आवाज उठाती रही हैं और पाकिस्तान हर वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को लेकर प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश में जुटा रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अनुच्छेद 370 को कब हटाया गया था?

भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था।

2. कश्मीर मुद्दे पर शिमला समझौता क्या कहता है?

1972 का शिमला समझौता स्पष्ट करता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर सहित सभी मुद्दों को केवल आपसी द्विपक्षीय बातचीत से ही सुलझाया जाएगा।

3. क्या UN कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता कर सकता है?

नहीं, भारत का स्पष्ट रुख है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह एक द्विपक्षीय मामला है, इसलिए इसमें UN या किसी अन्य तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है।

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रिपोर्टर: Alka Singh

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