क्या दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका के पास लंबे युद्ध में टिके रहने के लिए पर्याप्त हथियार बचे हैं? यह सवाल अब वैश्विक रक्षा विश्लेषकों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। मध्य पूर्व में ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा दागी जा रही मिसाइलों को रोकने के चक्कर में अमेरिकी सेना का सबसे एडवांस मिसाइल डिफेंस स्टॉक तेजी से खाली हो रहा है।
THAAD की 80% मिसाइलें खर्च, पैट्रियट भी आधा खत्म
सीएनएन (CNN) की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में अमेरिकी सेना के आकलन से जुड़े कई उच्च अधिकारियों के हवाले से चौंकाने वाला दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने अपनी THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत इंटरसेप्टर इस्तेमाल कर लिए हैं।
यह मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतरिक्ष की सीमा के पास हवा में ही नष्ट करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, अमेरिका ने अपनी बहुचर्चित पैट्रियट (Patriot) मिसाइल रक्षा प्रणाली के भी करीब 50 प्रतिशत इंटरसेप्टर खर्च कर दिए हैं।
सैन्य तैयारियों पर मंडराया संकट
अमेरिकी सेना की इस खाली होती तिजोरी ने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है। सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में इंटरसेप्टर मिसाइलों का खत्म होना अमेरिका की भविष्य की युद्ध तैयारियों के लिए एक बेहद गंभीर संकेत है।
क्यों नहीं हो सकती तुरंत भरपाई?
- धीमी निर्माण प्रक्रिया: THAAD और पैट्रियट जैसी हाइटेक मिसाइलों को बनाने में महीनों का समय लगता है।
- अत्यधिक लागत: एक THAAD इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करोड़ों डॉलर होती है।
- सप्लाई चेन की रुकावट: आधुनिक हथियारों के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोचिप्स की आपूर्ति तुरंत संभव नहीं है।
वैश्विक संतुलन पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो अमेरिका के सामने अपने ही रक्षा गोदामों को सुरक्षित रखने का संकट पैदा हो जाएगा। यदि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र या दुनिया के किसी अन्य कोने में कोई नया संघर्ष छिड़ता है, तो अमेरिका के पास खुद को और अपने सहयोगियों को मिसाइल कवर देने की क्षमता सीमित हो जाएगी।
फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग मिसाइल निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दे रहा है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस भारी कमी को पूरा करने में कई वर्षों का समय लग सकता है।