बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद भी हालात शांत होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के एक हालिया बयान और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। इस ताजा बवाल का शिकार बांग्लादेश के स्टार ऑलराउंडर और पूर्व सांसद शाकिब अल हसन हुए हैं। उग्र भीड़ ने मागुरा स्थित उनके पैतृक आवास पर हमला बोल दिया और जमकर तोड़फोड़ की।
शाकिब अल हसन के घर पर हमला और तोड़फोड़
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने शाकिब अल हसन के घर को घेर लिया और अंदर घुसकर संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। बता दें कि शाकिब अल हसन पिछले चुनाव में शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' के टिकट पर सांसद चुने गए थे। इसी राजनीतिक संबंध के कारण वे तख्तापलट के बाद से ही प्रदर्शनकारियों के निशाने पर बने हुए हैं।
शेख हसीना के 'कैमरा बंद' बयान से बढ़ी तल्खी
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पूर्व पीएम शेख हसीना का हालिया बयान माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना ने अपने एक संबोधन में मौजूदा मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर तीखे हमले किए थे। उनके इस आक्रामक रुख के बाद अंतरिम सरकार और उनके समर्थकों के बीच चिढ़ और तनाव चरम पर पहुंच गया, जिसका नतीजा अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों पर हमलों के रूप में सामने आ रहा है।
हिंसा की इस नई लहर के मुख्य कारण
- राजनीतिक प्रतिशोध: हसीना सरकार के पतन के बाद अवामी लीग के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
- छात्र आंदोलन पर खामोशी: आंदोलन के दौरान शाकिब की चुप्पी से बांग्लादेश के आम युवाओं और प्रशंसकों में काफी नाराजगी थी।
- सुरक्षा का संकट: देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
"बांग्लादेशी क्रिकेट का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाले शाकिब अल हसन का राजनीतिक करियर अब उनके क्रिकेट करियर पर भारी पड़ता दिख रहा है।"
शाकिब के भविष्य पर मंडराए अनिश्चितता के बादल
शाकिब अल हसन इस समय देश से बाहर हैं और सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश लौटने में असमर्थ हैं। भारत के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज के दौरान उन्होंने स्वदेश जाकर अपना फेयरवेल टेस्ट खेलने की इच्छा जताई थी, लेकिन देश के बिगड़े हालात को देखते हुए यह संभव नहीं हो सका। एक महान ऑलराउंडर का करियर जिस मोड़ पर आकर खड़ा हुआ है, उससे दुनिया भर के क्रिकेट फैंस बेहद चिंतित हैं।
फिलहाल, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर देश में शांति बहाल करने का भारी दबाव है, लेकिन शेख हसीना के बयानों और अवामी लीग के खिलाफ जारी हिंसा को देखते हुए यह स्थिति जल्द संभलती नहीं दिख रही है।