देवों की नगरी काशी (Varanasi) में इन दिनों एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। हर-हर महादेव के जयघोष के बीच शहर के बाजारों में पारंपरिक त्योहारों की तैयारियां जोरों पर हैं। मौका है नाग पंचमी का, और सनातन संस्कृति के इस खास पर्व को लेकर बाबा विश्वनाथ की नगरी में उत्साह देखते ही बनता है। शहर के प्रसिद्ध बाजारों, विशेषकर ऐतिहासिक कचौड़ी गली और चौक क्षेत्र में पूजन सामग्री की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
कचौड़ी गली में सजा विशेष बाजार
वाराणसी की तंग गलियों में अपनी एक अलग पहचान रखने वाली कचौड़ी गली इन दिनों पूरी तरह से नाग पंचमी के रंग में रंग चुकी है। आम तौर पर अपने लजीज व्यंजनों के लिए मशहूर यह गली इस समय नाग देवता के पूजन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी सामग्री का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। दुकानों पर नाग देवता के चित्र, तांबे और चांदी के नाग-नागिन के जोड़े, सवा मन दूध के बर्तन, लावा, और विभिन्न प्रकार की मिठाइयां सजी हुई हैं।
दुकानदारों का कहना है कि इस बार बाजारों में पिछले सालों की तुलना में अधिक उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से ही महिलाओं और युवाओं की टोली पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों का रुख कर रही है।
बाजारों में क्या है खास?
- नाग देवता के चित्र: घरों के मुख्य द्वार पर चिपकाने के लिए विशेष पारंपरिक चित्र।
- धातु के नाग: पूजन के लिए तांबे, पीतल और चांदी से बने नाग-नागिन के जोड़े।
- पारंपरिक प्रसाद: लावा, दूध, और मौसमी फल जिनकी नाग पंचमी पर विशेष महत्ता है।
- पुष्प और मालाएं: नाग देवता को अर्पित किए जाने वाले पीले फूल और विशेष मालाएं।
नाग पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता (Serpent Gods) की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
काशी में इस पर्व की मान्यता बहुत पुरानी है। यहां नाग कूप और नागेश्वर नाथ मंदिरों में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। शहर के पंडा-पुरोहितों और ज्योतिषविदों का मानना है कि सावन के महीने में नाग पूजा करने से भगवान शिव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि नाग देवता भोलेनाथ के आभूषण हैं।
"काशी में हर पर्व अपनी एक अनूठी परंपरा के साथ मनाया जाता है। नाग पंचमी के दिन नागों के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व है। लोग दूर-दूर से यहां आकर नाग मंदिरों में मत् टेकते हैं और परिवार की रक्षा की कामना करते हैं।" - स्थानीय पुरोहित, पं. काशीनाथ शास्त्री
सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम
त्योहार के दौरान बाजारों में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। कचौड़ी गली, ठठेरी बाजार और मैदागिन जैसे व्यस्त इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि खरीदारी करने आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने भी दुकानदारों से अपील की है कि वे ग्राहकों की सुविधा का पूरा ध्यान रखें और उचित दरों पर सामग्री उपलब्ध कराएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नाग पंचमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
नाग पंचमी प्रकृति और जीवों के प्रति सम्मान प्रकट करने का पर्व है। इस दिन नाग देवता की पूजा करके उनसे परिवार की रक्षा और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
2. वाराणसी में नाग पंचमी के लिए कौन सी जगह सबसे प्रसिद्ध है?
वाराणसी में नाग कूप मंदिर और विभिन्न प्राचीन शिव मंदिर नाग पंचमी के पूजन के लिए मुख्य केंद्र माने जाते हैं, जहां भक्तों का तांता लगा रहता है।
3. नाग पंचमी पर किस चीज की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है?
इस दिन जीवित नागों को कष्ट न देकर उनकी मूर्तियों, चित्रों या धातु से बने नाग-नागिन के जोड़ों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध व लावा अर्पित किया जाता है।