जौनपुर (उत्तर प्रदेश)। एक छोटी सी लापरवाही ने दो हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में उजाड़ दीं। जौनपुर जिले के बरसठी थाना क्षेत्र स्थित गारोपुर गांव में बुधवार शाम को एक बेहद दुखद हादसा सामने आया, जहां समरसेबुल बोरिंग के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में डूबने से दो मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई।
इस हृदयविदारक घटना के बाद से ही पूरे गारोपुर गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
खेलते-खेलते मौत के मुहाने तक पहुंचे मासूम
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गारोपुर गांव निवासी अच्छेलाल उर्फ पप्पू गौतम ने मंगलवार को समरसेबुल पंप लगाने के लिए बोरिंग कराई थी। बोरिंग के बाद गड्ढे को खुला ही छोड़ दिया गया था। पिछले दिनों हुई बारिश के चलते इस गहरे गड्ढे में काफी पानी और दलदल भर गया था।
बुधवार शाम करीब 5 बजे गांव के ही वीरेंद्र बिंद का 6 वर्षीय पुत्र शिवा बिंद और अनिल बिंद का मासूम बेटा आरव बिंद घर के बाहर खेलते-खेलते उस गड्ढे की ओर चले गए। खेलते समय अचानक पैर फिसलने से दोनों मासूम गहरे पानी और कीचड़ से भरे गड्ढे में जा गिरे।
तलाश के दौरान गड्ढे में फंसे मिले बच्चे
जब काफी देर तक दोनों बच्चे घर वापस नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव में बच्चों की तलाश शुरू की। घर से लगभग 100 मीटर दूर जब लोग बोरिंग वाले गड्ढे के पास पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए।
- दोनों मासूम गड्ढे के पानी और दलदल में बेसुध पड़े हुए थे।
- ग्रामीणों ने तुरंत दोनों को बाहर निकाला और प्राथमिक उपचार के लिए कटवार बाजार ले गए।
- हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें भदोही के सुरियावां स्थित एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
सुरियावां के निजी अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों मासूमों को मृत घोषित कर दिया। जैसे ही यह खबर परिजनों तक पहुंची, अस्पताल से लेकर गांव तक चीख-पुकार मच गई।
"एक लापरवाही ने गांव की दो उम्मीदें छीन लीं। अगर बोरिंग के बाद गड्ढा ढक दिया गया होता, तो आज दोनों बच्चे हमारे बीच जीवित होते।" — एक ग्रामीण
पुलिस जांच में जुटी, उठ रहे लापरवाही पर सवाल
हादसे की सूचना मिलने के बाद बरसठी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले की जांच कर रही है।
बारिश के मौसम में खुले गड्ढों को छोड़ना किस कदर जानलेवा साबित हो सकता है, इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है। ग्रामीणों में ठेकेदार और गृहस्वामी की इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है।