क्या आपने कभी सोचा है कि देश की सीमाओं पर दिन-रात पहरा देने वाले सैनिक जब अपनी वर्दी उतारकर समाज के बीच पहुंचते हैं, तो वे क्या करते हैं? वे बंदूक छोड़कर कलम और किताबों से नाता जोड़ लेते हैं। जी हां, कुछ ऐसी ही दिल को छू लेने वाली तस्वीर इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तराखंड के कोटद्वार से सामने आई है, जहां के पूर्व सैनिकों ने एक अलग ही अंदाज में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया।
सीमाओं की रक्षा करने वाले इन वीर जवानों ने इस बार अपना पर्व बड़े होटलों या सभागारों में नहीं, बल्कि स्थानीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नौनिहालों के बीच बिताया। पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार द्वारा उठाया गया यह कदम आज के समाज के लिए एक बड़ी सीख और प्रेरणा है।
सरकारी स्कूलों में धड़कता है देश का असली दिल
अक्सर यह देखने को मिलता है कि लोग चमक-धमक वाली जगहों पर राष्ट्रीय पर्व मनाना पसंद करते हैं, लेकिन पूर्व सैनिकों का यह मानना है कि देश की असली ताकत और प्रतिभा हमारे सरकारी विद्यालयों और दिव्यांग संस्थानों में ही पलती-बढ़ती है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भले ही आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव से जूझते हों, लेकिन उनके भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा सबसे ज्यादा होता है।
समिति का मुख्य उद्देश्य यही था कि इन बच्चों को फौजियों के अनुशासन, त्याग और राष्ट्रप्रेम से रूबरू कराया जाए। जब एक सैनिक वर्दी में इन बच्चों के बीच पहुंचता है, तो बच्चों की आंखें चमक उठती हैं और उनके दिलों में देशसेवा का बीज अंकुरित होता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंजा विद्यालय परिसर
स्वतंत्रता दिवस के इस पावन अवसर पर विद्यालय का प्रांगण किसी भव्य उत्सव से कम नहीं लग रहा था। बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और एक से बढ़कर एक देशभक्तिपूर्ण गीत, नाटक और नृत्य प्रस्तुत किए। बच्चों की मासूमियत और उनके अंदर देश के प्रतिार प्रेम को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम और गर्व से चौड़ी हो गईं। तिरंगे की शान में गाए गए तराने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग रहे थे।
बच्चों के लिए सौगातों का पिटारा और सहयोग
पूर्व सैनिकों ने केवल औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों का पूरा ख्याल रखा। इस कार्यक्रम की मुख्य झलकियां निम्नलिखित रहीं:
- शुद्ध पेयजल की व्यवस्था: बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए समिति की ओर से विद्यालय को 20 लीटर का एक स्टील कैंपर भेंट किया गया, ताकि नौनिहालों को हमेशा साफ पानी मिल सके।
- मिष्ठान और उल्लास: स्वतंत्रता दिवस की खुशी को दोगुना करते हुए सभी बच्चों के बीच विशेष जलपान और मिठाइयां बांटी गईं, जिन्हें पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।
- आर्थिक सहयोग: शिक्षा के रास्ते में पैसों की तंगी कभी दीवार न बने, इसके लिए समिति के कोषाध्यक्ष श्री देवेंद्र सिंह बिष्ट जी ने अपनी ओर से विद्यालय परिवार को ₹1100 की सम्मान राशि स्वेच्छा से प्रदान की।
समाज से एक गंभीर और जरूरी अपील
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार ने सिर्फ एक दिन का जश्न नहीं मनाया, बल्कि समाज के सामने एक आईना रखा है। समिति ने शहर के अन्य सभी सक्षम संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और संपन्न नागरिकों से यह पुरजोर अपील की है कि वे आएं और सरकारी स्कूलों को गोद लें या उनकी मदद के लिए आगे आएं।
यदि समाज का हर वर्ग अपने स्तर पर इन होनहार बच्चों की थोड़ी सी भी मदद करे, तो आने वाले समय में यही बच्चे देश के सर्वोच्च पदों पर बैठकर भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेंगे।
इनका रहा विशेष योगदान
इस पूरे आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में समिति के उपाध्यक्ष श्री नंदन सिंह जी की भूमिका बेहद सराहनीय रही। उनके अथक प्रयासों से ही यह कार्यक्रम इतनी भव्यता के साथ संपन्न हो सका। इसके साथ ही, विद्यालय की सम्मानित प्रधानाचार्या श्रीमती विभा रावत जी और उनके पूरे स्टाफ ने पूर्व सैनिकों का खुले दिल से स्वागत किया और उन्हें बच्चों के बीच अपने अनुभव साझा करने का सुनहरा मौका दिया।
"संसाधनों के अभाव में देश का कोई भी बच्चा पीछे नहीं छूटना चाहिए। हमारे सैनिक देश की सरहदों के साथ-साथ अब देश के भविष्य को भी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" - पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार
यह पहल साबित करती है कि फौजी केवल सरहद पर ही नहीं, बल्कि समाज के भीतर भी रक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका बखूबी निभा सकते हैं। आइए, हम सब भी इस प्रेरणा से सीख लें और देश के नौनिहालों के सपनों को नई उड़ान देने में अपना योगदान दें। जय हिंद! 🇮🇳
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: पूर्व सैनिक संघर्ष समिति, कोटद्वार ने स्वतंत्रता दिवस कहां मनाया?
समिति ने यह पावन पर्व स्थानीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बच्चों के साथ मनाया, ताकि सरकारी स्कूलों के बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके।
Q2: इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों के बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाना, उन्हें पूर्व सैनिकों के अनुशासन से प्रेरित करना और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी मदद करना था।
Q3: समिति की तरफ से विद्यालय को क्या सहयोग दिया गया?
समिति ने बच्चों के लिए शुद्ध पेयजल हेतु एक स्टील कैंपर, मिष्ठान, जलपान और शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग के रूप में ₹1100 की राशि भेंट की।