चंदौली: विंध्य एक्सप्रेसवे के खिलाफ उग्र हुआ किसानों का गुस्सा, सर्वे टीम को पचोखर से बैरंग लौटाया
👉चंदौली। विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway) भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले जारी अनिश्चितकालीन धरने के 18वें दिन पचोखर गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बिना किसी पूर्व सूचना के सर्वे करने पहुंची टीम को स्थानीय किसानों ने सख्त विरोध जताते हुए बैरंग वापस लौटा दिया। किसानों का साफ कहना है कि जब तक प्रशासन उनसे सीधी वार्ता नहीं करता, तब तक कोई भी सर्वे या अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू नहीं होने दी जाएगी।चौपाल में गूंजा किसानों का कड़ा रुख
घटना के तुरंत बाद हरकत में आए उपजिलाधिकारी (SDM) राजीव मोहन सक्सेना ने आनन-फानन में पचोखर, शिवनाथपुर और चंदाइत गांवों के किसानों के साथ एक चौपाल का आयोजन किया। इस दौरान किसानों ने दोटूक शब्दों में कहा कि यूपीडा (UUPIDA), जिला प्रशासन और प्रभावित किसानों के बीच त्रिस्तरीय वार्ता आयोजित की जाए।
किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजने के साथ ही स्पीड पोस्ट भी किया है, जिसमें मांग की गई है कि वार्ता पूरी होने तक जमीन अधिग्रहण की सभी कार्रवाइयों पर तुरंत रोक लगाई जाए।
👉विकास का विरोध नहीं, पर बिना नोटिफिकेशन छीनी जा रही जमीन"
भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष सतीश सिंह चौहान ने प्रशासन और यूपीडा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा:
🚜किसान किसी भी विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्रभावित होने वाले परिवारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार परियोजनाओं के लिए रोडमैप बना लेती है, लेकिन उससे उजड़ने वाले किसानों के लिए कोई योजना नहीं होती। बिना किसी आधिकारिक नोटिफिकेशन के सीधे खेत में पत्थर गाड़ने और सर्वे करने पहुंचना पूरी तरह असंवैधानिक है।"58 गांवों के भविष्य पर संकट, 'जान देंगे पर जमीन नहीं'
किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक मणि देव चतुर्वेदी के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से लगभग 58 गांवों के किसान प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। धरने पर बैठे किसानों ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए कहा— "जान दे देंगे, लेकिन अपनी उपजाऊ जमीन नहीं देंगे।"
धरना स्थल पर प्रमुख रूप से सतीश सिंह चौहान, डॉ. राजीव मौर्या, श्रवण मौर्या, अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रतिनिधि, रामनारायण यादव, संजय सिंह, प्रभाकर सिंह, प्रकाश पांडेय, मंगल सिंह, रणजीत सिंह, बहादुर यादव, श्याम कार्तिक चौहान और भगत चौहान समेत भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।